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प्रदूषण रोकने में सरकारी अमला फेल

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गाजीपुर। जिले में प्रदूषण रोकने के सरकारी उपाय नहरों और कागजों तक ही सीमित हैं। वायु को प्रदूषित होने से रोकने के लिए सरकारी कागजों में चाहे जितने भी शौचालय बनवाए गए हों, लेकिन हकीकत यही है कि आज भी एक बड़ी आबादी खुले में शौच करती है। जल को प्रदूषण से बचाने के लिए नमामि गंगे जैसी योजनाएं चलाई गई, जो नहरों और हस्ताक्षर अभियानों तक ही कैद होकर रह गई। यही हाल ध्वनि प्रदूषण का है। डीजे बजाने के रोक पर कोर्ट के आदेश के बाद भी कानफाड़ू आवाज के साथ डीजे बज रहे हैं। जनपद प्रदूषण रोकने में सरकारी अमला पूरी तरह नाकाम है और उनकी योजनाएं कागजों और फाइलों में कैद हैं।
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जिले को जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कोई ठोस उपाय अभी तक नहीं किया गया है। इनके लिए अभी तक जो भी प्रयास किए गए ज्यादातर फाइलों में ही कैद होकर रह गए हैं। जिले की नदियां दूषित होती जा रही हैं। हैँडपंप तक आर्सेनिकयुक्त पानी दे रहे हैं। नगर पालिका परिषद की नालियों के फुटने से जलापूर्ति का पानी भी दूषित हो गया है। पानी में नाली का गंदा पानी तक मिला है। नाली और नालों के पास लगे हैंडपंप का पानी भी प्रदूषित हो गया है। नदियां दूषित न हों और उनका अस्तित्व बना रहे इसके लिए तटों पर वनों को लगाए जाने की तैयारी चल रही है। वनों के लगने से बाहरी मिट्टी और बालू नदी के पेटे में कटकर नहीं जाएगा और नदी में गहराई बनी रहेगी। नदी के सूखने तथा पानी कम होने से जल प्रदूषण का खतरा और बढ़ जाता है। नदी किनारे वन लगाने के लिए वानिकी विभाग कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने जा रहा है। नदियों के प्रदूषण को रोकने के लिए नमामि गंगे योजना चलाई गई, लेकिन यह भी कागजों तक सीमित है। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए वाहनों के तेज आवाज वाले हार्न तथा कानफाड़ू डीजे पर रोक लगा दी गई है। लेकिन हर तरफ डीजे की धुन सुनाई दे रही है। यही हाल वायु प्रदूषण का है। खुले में शौच, चिमनियों से निकलने वाले धुएं तथा रसोई गैस के धुएं पर रोग के लिए लगातार प्रयास किया गया। खुले में लोग शौच न करें इसके लिए घर-घर शौचालय का निर्माण किया गया। खुले में शौच पर अब भी रोक नहीं लग सकी है। जबकि चूल्हे पर खाना बनाने की जगह गैस सिलेंडर का प्रयोग होने से कुछ हद तक वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया गया है। लेकिन अब भी जल, वायु तथा ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि जल, वायु तथा ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए सरकारी कवायद बिल्कुल कागजी है। इस दिशा में अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बढ़ता प्रदूषण एक दिन जानलेवा साबित होगा। इससे सजग और सचेत रहना जरूरी है।
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