गाजीपुर। निजी स्कूलों की महंगी पढ़ाई पर लगाम लगाने के मकसद से अगले सत्र से एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य करने की मांग उठने लगी है। जिले में अभिभावक संघ इसे लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहा है। संघ के लोगों को कहना है कि उत्तराखंड में कक्षा एक से 12वीं तक एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जाए इसकी मांग तेज हो गई है। शिक्षा विभाग से प्रस्ताव भेजने तथा इसे शासन से जल्द मंजूरी प्रदान करने की भी मांग की जा रही है।
निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबों को लागू करना अभिभावकों का बोझ कम करना है। इसके लिए विद्यालय संचालकों के साथ जनप्रतिनिधियों को कदम बढ़ाने की जरूरत है। कई बार सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की प्रतियां, नियम विरुद्ध तरीके से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को पाठ्यक्रम में पढ़ाने, अयोग्य अध्यापकों की नियुक्ति करने, नियम अनुसार वेतन नहीं देने, नियम विरुद्ध तरीके से अध्यापकों को नौकरी से निकालने, अधिक फीस लेने, प्रतिवर्ष नामांकन के नाम पर ठगी करने के संबंध में सूचना मांगी जाती है तो, सूचना उपलब्ध नहीं है, का जवाब देकर इतिश्री कर लिया जाता है।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष मारूति कुमार राय का कहना है कि तमाम नियम-कायदों की हत्या करते हुए शिक्षा का बाजारीकरण कर दिया गया है। लोग इसके नाम पर गोरखधंधा करने लगे हैं, उससे स्पष्ट है कि शिक्षा और संस्कार जैसी बातें उनकी प्राथमिकता में है ही नहीं। संघ अभिभावकों के चेहरे पर खुशी लाने के लिए आंदोलन जारी रखने को तैयार हैं। सचिव श्याम जी चौधरी ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों पर लगाम लगाने का पहला सपना कब साकार होगा यह हम नहीं जानते, लेकिन उत्तराखंड के तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें हर हाल में लागू हों और अगले सात सालों तक प्राइवेट स्कूलों में एक ही किताब चलें। ऐसे लागू कराने के लिए अभिभावक संघ शिक्षा मंत्री से लेकर सरकार तक को घेरने को काम करेगा। कोषाध्यक्ष संतोष उपाध्याय ने बताया कि आश्चर्य होता है कि शिक्षा विभाग और खंड शिक्षा अधिकारी अभिभावकों का शोषण होते देखने के बाद भी निजी स्कूलों के विरुद्ध कार्रवाई करने से बचते रहे हैं और कुछ नहीं कर पाने की विवशता जाहिर कर देते हैं। प्रवक्ता जय प्रकाश ने कहा कि सीबीएसई नियम और शर्तें कह रहे हैं कि निजी स्कूलों द्वारा राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों, आदेशों का अनुपालन करना अनिवार्य है, लेकिन इसका कोई पालन नहीं करता।