बिरनो। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ब्लाक के देवकठिया गांव में मछली पालन के दौरान तालाब की तैयारी, रख-रखाव एवं मछलियों में होने वाले प्रमुख रोग विषय पर गुरुवार को प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्र के पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. डीपी श्रीवास्तव ने बताया कि अगर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रबंधन तथा पेशेवर परामर्श के द्वारा मछली पालन किया जाय तो इसमें आसानी से दो से तीन गुना किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। इसमें सबसे पहले तालाब की तैयारी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अगर तालाब सूखा हो तो उसकी दो बार दो विपरीत दिशाओं में जुताई करने के बाद उसके पीएच के आधार पर उसमें चूने का छिड़काव करें। इसके बाद दोबारा जुताई कर उसमें उचित मात्रा में गोबर की खाद का उपयोग करें। मछलियों के बढ़वार के लिए हल्का क्षारीय माध्यम अधिक उपयुक्त होता है। इसमें मछलियों की बढ़वार काफी तेज गति से होती है। मत्स्य पालक यह अवश्य ध्यान दें कि अगर तालाब की मिट्टी अम्लीय है तो उसमेें चूने का छिड़काव करेें, जिससे मिट्टी को क्षारीय बनाया जा सके। कहा कि अक्सर यह देखा जाता है कि मत्स्य पालक मिट्टी की गुणवत्ता पर कम ध्यान देते हैं। तालाब की तैयारी उचित तरीके से न करने की वजह से मछलियों में तरह-तरह की बीमारियां समय-समय पर आती रहती हैं। इस दौरान ट्रैट्रासाइक्लिन दवा या लाल दवा का छिड़काव पानी में करने से इस रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान देवकठिया गांव में ही पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर के दौरान कुल 50 जानवरों का उपचार कर उनको नि:शुल्क दवा वितरित की गई। शिविर में रमेश यादव, इंद्रदेव यादव, अंबिका यादव, चंद्रिका, उमेश, कैलाश, राकेश, मनोज आदि किसान उपस्थित थे।