गाजीपुर। बाढ़ के मद्देनजर जिले में 160 बाढ़ चौकियां बनाई जाएंगी। 357 बड़ी-छोटी नावों की व्यवस्था की गई है, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्यों में मुस्तैद की जाएंगी। जबकि कंट्रोल रूम के साथ 44 बाढ़ शरणालय और 35 बाढ़ राहत केंद्र बना दिए गए हैं।
जनपद में बाढ़ का खतरा अगस्त के अंत से लेकर और सितंबर तक ज्यादा रहता है। पिछले साल गंगा चेतावनी बिंदु पार कर गई थी, जिससे 92 गांव प्रभावित हुए थे।
इसके मद्देनजर बाढ़ से निपटने की तैयारियों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। वर्ष 2022 में 186 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे।
जिला प्रशासन ने बाढ़ से संबंधित 449 गांवों को चिह्नित किया है। इनमें 80 अतिसंवेदनशील, 154 संवदेनशील और 215 गांव सामान्य श्रेणी में रखे गए हैं। पिछले वर्ष 18 सितंबर को गंगा का जलस्तर 63.670 मीटर पहुंच गया था।
इससे 92 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। जबकि उसके पहले वर्ष 2022 में गंगा का जलस्तर 64.390 मीटर पहुंच गया था, जिसमें कुल 186 ग्राम प्रभावित हुए थे।
हर बाढ़ चौकी पर लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी, एएनएम, आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की सूचना उपलब्ध रहेगी।
बाढ़ के समय पानी भर जाने पर उसे निकालने का जिम्मा संबंधित विभाग को दिया गया है। बाढ़ के दौरान नगर पालिका और नगर पंचायतों के ईओ पीड़ित लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराएंगे।
चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सभी बाढ़ चौकियों और राहत शिविरों में चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे। इसी तरह छोटी-बड़ी कुल 357 नावों की व्यवस्था की गई है, जिनमें 86 बड़ी नाव, 145 मझोली नाव और 71 इंजनयुक्त नाव शामिल हैं।
वहीं 517 आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया गया है। जिला एवं तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है।
जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में कंट्रोल रूम प्रतिदिन 24 घंटे संचालित रहता है, जिसका नंबर-0548-2224041 एवं 9454417103 है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 56.010 मीटर दर्ज किया गया।