सादात। आजादी की लड़ाई में जिले के पुरुष क्रांतिकारियों के साथ-साथ महिला क्रांतिकारियों की भी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। पुरुष क्रांतिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर वह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने में पीछे नहीं रहीं। इस लड़ाई में जिले की एक महिला क्रांतिकारी शहीद हुईं थी, 13 महिलाओं को जेल जाना पड़ा था।
वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान अंग्रेज पुलिस का मुकाबला करते हुए जिले के कुल 15 क्रांतिकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इनमें एक महिला क्रांतिकारी राधिका देवी भी शामिल हैं। अंग्रेज पुलिस जब 29 अगस्त 1942 को शेरपुर गांव में पहुंची तो लोगों ने उसका घोर विरोध करते हुए उनका जमकर मुकाबला किया। इसमें राधिका देवी पत्नी जगरनाथ पांडेय, रमाशंकर लाल श्रीवास्तव और खेदन सिंह यादव शहीद हुए थे। इसके अलावा इस आंदोलन में जिले के कुल 12 क्रांतिकारी पुलिस की गोली लगने से घायल हुए थे। महात्मा गांधी की ओर से 8 अगस्त को मुंबई में भारत छोड़ो आंदोलन का बिगुल बजाते ही जिले में क्रांति की लहर दौड़ पड़ी थी। 15 अगस्त 1942 को सादात में थाना एवं स्टेशन फूंकने और डाकघर लूटने की घटना हुई थी। इसमें एक क्रांतिकारी शहीद हो गया था और एक क्रांतिकारी पुलिस की गोली से घायल हुआ था। इस घटना में दो पुलिस कर्मियों को जिंदा जला दिया गया था। 18 अगस्त 1942 को नंदगंज रेलवे स्टेशन पर खड़ी 52 डिब्बे की मालगाड़ी को क्रांतिकारियों ने लूट लिया था। इसमें सेना के लिए खाद्य सामग्री भरी थी जो कलकत्ता जा रही थी। लूट के दौरान मौके पर पहुंची अंग्रेज पुलिस ने क्रांतिकारियों पर ताबड़तोड़ 175 राउंड गोलियां चलाकर 80 से अधिक लोगों को मौत दे दी थी। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस घटना के साथ ही उसी दिन मुहम्मदाबाद तहसील पर तिरंगा झंडा फहराने को लेकर क्रांतिकारियों और पुलिस में मुठभेड़ हुई। इसमें डॉ. शिवपूजन राय सहित कई क्रांतिकारी शहीद हो गए थे। यह सभी क्रांतिकारी शेरपुर कला गांव के रहने वाले थे। इस घटना में नौ क्रांतिकारी घायल हुए थे। इसके अलावा एक क्रांतिकारी गहमर का घायल हुआ था। आजादी की लड़ाई के दौरान जेल जाने वाली कुल 13 महिला क्रांतिकारियों में सादात की चंपा देवी, अलगी देवी, सैदपुर की केशरी देवी, विद्या देवी, रेवतीपुर की सुशीला देवी, नवाबगंज की लक्ष्मी देवी, गोहदा की गुलज़ारी देवी शामिल हैं। इनके अलावा धनराजी देवी, सुभागी देवी, महराजी देवी, यशोदा देवी, पानफूल देवी और रामदुलारी देवी का नाम भी जेल जाने वालों की सूची में शामिल है।
इतिहास के पन्नों में दर्ज तीन क्रांतिकारियों का नाम-सादात। काले पानी की दोहरी सजा पाने वाले ज़िले के तीन क्रांतिकारियों का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। इन क्रांतिकारियों में बभनौली सैदपुर के बालरूप शर्मा, गदाईपुर गहमर के जयशंकर उपाध्याय और बरहपार भीमापार के राजनाथ सिंह का नाम शामिल है। जब भी भारत छोड़ो आंदोलन और आजादी की लड़ाई की बात आती है तो इन तीनों क्रांतिकारियों का नाम आदर के साथ लिया जाता है। संवाद