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राजर्षि जूदेव ने शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर जलाया शिक्षा का दीप

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गाजीपुर। राजर्षि उदयप्रताप सिंह जूदेव की 167वीं जयंती सत्यदेव डिग्री कालेज गाधिपुरम (बोरसिया) में रविवार को धूमधाम से मनाई गई। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि योग और कर्म के बदौलत ही राजर्षि उदय प्रताप सिंह ने 1905 में यूपी कालेज की स्थापना कर गुलाम भारत को एक नई चेतना प्रदान किया। उन्होंने विभिन्न शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर शिक्षा का दीप जलाया। उनका चरित्र अनुकरणीय है।
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समारोह के प्रथम सत्र में विचार गोष्ठी एवं द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी हुई। विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने राजर्षि उदय प्रताप सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान काशी हिंदू विश्व विद्यालय के प्राध्यापक डा. प्रभाकर सिंह ने कहा कि जीवन की सार्थकता तभी है, जब वह राष्ट्र एवं समाज हित में काम आए। द्वितीय सत्र के कवि गोष्ठी में अनपरा से आए कवि कमलेश राजहंस ने अपनी ओजपूर्ण रचनाएं सुनाकर श्रोताओं में वीर रस का संचार किया। इलाहाबाद से आए हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने श्रोताओं को हंसाकर लोट-पोट कर दिया। गोरखपुर से आई डा. चेतना पांडेय एवं आकाशवाणी पटना से आए शंकर कैमूरी एवं हिंदी सलाहकार समिति रेल मंत्रालय के सदस्य हरिनारायण ह रीश ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी। कुमार प्रवीण एवं संज्ञा तिवारी की भी रचनाएं खूब सराही गई। लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रबंध निदेशक डा. सांनद सिंह ने कहा कि शिक्षा से ही देश और समाज का विकास हो सकता है। शिक्षा एक माध्यम है, जो जिंदगी की बेकारी और लाचारी को दूर कर सकती है। समाज में परिर्वतन और जागरूकता केवल शिक्षा से ही हो सकती है। डा. सानंद सिंह ने साहित्यकार शेख जैनूल आब्दीन, डा. गजाधर शर्मा गंगेश, कामेश्वर द्विवेदी, उमाशंकर पथिक, रामावतार, साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी, डा. समरबहादुर सिंह, डा. संतोष कुमार सिंह, डा. बद्री सिंह, डा. मान सिंह, छविनाथ मिश्रा, डा. सुधा त्रिपाठी, डा. सदानंद पांडेय, डा. डीआर सिंह आदि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।इससे पूर्व जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन इंटरनेशनल गीता गुरुकुल फाउंडेशन के संस्थापक योगी आनंद ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्राध्यापक डा. रघुवीर सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि सतीशचंद्र कालेज बलिया के प्राचार्य डा. अशोक कुमार उपाध्याय सहित अन्य लोग मौजूद थे। अध्यक्षता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक प्रो. सिद्धनाथ उपाध्याय ने की।
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