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ट्रेन में यात्री-कांवड़ियों में संघर्ष, गोलियां चलीं

Wed, 26 Feb 2014 10:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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लखनऊ से आ रही अवध एक्सप्रेस में मंगलवार रात ढाई बजे के लगभग सेंट्रल स्टेशन से कुछ पहले यात्री और कांवड़ियों में संघर्ष हो गया। गोलियां चल गईं। इसमें औरैया का एक कांवड़िया चंद्रप्रकाश (24) गोली लगने से घायल हो गया।
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इससे गुस्साए कांवड़ियों ने सेंट्रल पहुंचते ही जमकर उत्पात मचाया। अवध एक्सप्रेस के शीशे तोड़ डाले। सिटी साइड पूछताछ और आरक्षण काउंटर में तोड़फोड़ की। स्टेशन पर घूम-घूम कर पथराव-तोड़फोड़ की। अफरा-तफरी मच गई।

पुलिस ने लाठियां पटककर बवाल को काबू किया। 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस ने तीन को गिरफ्तार किया। गोलियां किसने चलाईं, यह पता नहीं चल पाया। घायल को हैलट अस्पताल ले जाया गया है।
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सीट को लेकर हुआ झगड़ा

गोरखपुर से आ रही अवध एक्सप्रेस में बुढ़वल (बाराबंकी) से बड़ी संख्या में कांवड़िये सवार हुए थे। स्लीपर कोचों में भी उनकी भीड़ देख यात्री भी सिमटे थे। करीब 40 कांवड़िये एस-6 कोच में थे।

ट्रेन के सेंट्रल स्टेशन पहुंचने से थोड़ा पहले इस कोच में सीट पर बैठने को लेकर यात्रियों और कांवड़ियों में झगड़ा हो गया। बात बढ़ते ही मारपीट शुरू हो गई। इसी बीच किसी ने गोलियां चला दीं। दो गोलियां पुरवा झाबर अजीतमल (औरैया) के चंद्रप्रकाश के पेट में लगीं।

वह बाथरूम से निकलकर सीट की तरफ जा रहा था। वह कोच के फर्श पर तड़पने लगा। चंद्रप्रकाश के साथ उसका बड़ा भाई श्याम नारायण (35) भी था। कोच में भगदड़ मच गई। तब तक ट्रेन सेंट्रल के प्लेटफॉर्म नंबर आठ पर जा पहुंची।
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फोर्स देख कांवड़िए भागे

कांवड़िये शोर मचाकर साथियों को आवाज देते प्लेटफॉर्म पर लाठी लेकर उतरे और ट्रेन के शीशे तोड़ने लगे। जीआरपी और आरपीएफ के जवान भी पहुंचे। फोर्स देख कांवड़िये भागने लगे। बहुत से सिटी साइड की तरफ भागे। उन्होंने वहां पूछताछ काउंटर में भी तोड़फोड़ की। दर्जनों लाइटें तोड़ डालीं।

आरक्षण काउंटर भी तहस-नहस कर दिया। बवाल देख 2.55 बजे ट्रेन आगरा रवाना कर दी गई। करीब साढ़े 3 बजे बवाल शांत हो पाया। आरपीएफ ने तीन कांवड़ियों नीरज, गोलू और दीपू को गिरफ्तार किया है। तीनों ही पुरवा झाबर अजीतमल के रहने वाले हैं।

न मिली मदद, तड़पते भाई को कंधे पर ले गया
प्लेटफार्म पर जीआरपी और आरपीएफ जहां बवाल काबू करने में व्यस्त थी। वहीं खून से लथपथ चंद्रप्रकाश तड़पता रहा। कोई मदद को आगे न आया। मजबूरन भाई श्यामनारायण को उसे कंधे पर लादकर घंटाघर तक लाना पड़ा। यहां से उसे ऑटो में हैलट ले जाया गया। जीआरपी एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि श्याम नारायण की तहरीर पर एक अज्ञात पर जान से मारने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले की जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
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