आजमगढ़ के जीयनपुर में पूर्व विधायक व बसपा नेता सर्वेश सिंह सीपू की हत्या के बाद हुए बवाल के दौरान पुलिस फायरिंग में घायल संजय विश्वकर्मा (23 वर्ष) की मंगलवार को सुबह मलदहिया स्थित एक अस्पताल में मौत हो गई।
इस तरह 19 जुलाई को हुए हंगामे में पुलिस फायरिंग से मरने वालों की संख्या तीन हो गई जबकि पूर्व विधायक समेत कुल पांच लोग मारे गए हैं।
वाराणसी में अस्पताल में मौत के बाद शव को कब्जे में लेने के मुद्दे पर परिवार के लोगों और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
बीएचयू पोस्टमार्टम हाउस पर दो चिकित्सकों की संख्या कम रहने के कारण भी शव के पोस्टमार्टम में देर रात तक गतिरोध बना हुआ था।
इन घटनाक्रमों के बीच परिवार वालों ने आरोप लगाया कि पुलिस वाराणसी में ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बना रही है। खबर लिखे जाने तक परिवार के सदस्य शव को आजमगढ़ ले जाने पर अड़े हुए थे।
गौरतलब है कि जीयनपुर में शुक्रवार को बदमाशों ने पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू समेत दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पुलिस और पब्लिक के बीच संघर्ष हो गया था।
पुलिस फायरिंग में आजमगढ़ के आनंदपुर निवासी संजय विश्वकर्मा की कमर में गोली लगी थी। उसे वाराणसी के मलदहिया स्थित सिंह मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था।
मंगलवार की भोर में उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिवार के सदस्यों और अस्पताल प्रबंधन के बीच शव को देने के मुद्दे पर तकरार हुई। मृत युवक के पिता बालचंद और चचेरे भाई रवि ने आरोप लगाया कि उन्हें मौत की सूचना दी गई लेकिन शव के पास नहीं जाने दिया गया।
अस्पताल प्रबंधन ने उनसे इलाज के बकाया 84 हजार 777 रुपये चुकाने के बाद ही शव देने की बात कही। वहीं अस्पताल के निदेशक डा. अशोक सिंह ने कहा कि परिवार के लोग शव लेकर जाना चाहते थे।
उनसे यही कहा गया कि पुलिस को सूचना देने के बाद ही शव दिया जाएगा। जिसके बाद परिवार के लोग हल्ला हंगामा करने लगे थे। कुछ देर बाद सिगरा थानाध्यक्ष श्याम बहादुर यादव मौके पर पहुंचे।
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पंचायतनामा के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बीएचयू स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया। उधर. बीएचयू में शव के पोस्टमार्टम का मामला दो चिकित्सकों की कमी के कारण फंसा हुआ है।