पुलिस द्वारा दो वर्ष पूर्व हत्या के मामले में फंसाए गए आरोपी उदय प्रताप सिंह को अपर सत्र न्यायाधीश सत्य प्रकाश ने साक्ष्य और गवाहों के अभाव में दोषमुक्त करते हुए न्यायालय से बरी कर दिया। इस केस में फर्जीवाड़ा करने वाली पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दस दिन के अंदर न्यायालय को सूचित करने के आदेश दिए हैं। एसपी का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन करने हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
घटनाक्रम शिकोहाबाद थाने से जुड़ा हुआ है। 23 जनवरी 2013 को थानाध्यक्ष वीके तिवारी मय उपनिरीक्षक रामबाबू पाठक, सिपाही राजीव, संजीव, शरद, ब्रजेश गश्त पर थे। तभी पुलिस को सूचना मिली कि रामेश्वर रिसोर्ट में हुई राजेश की हत्या का नामजद आरोपी शिट्टू उर्फ उदय प्रताप सिंह यादव एटा जाने वाले मोड़ पर खड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसको पकड़ लिया और थाने ले आई। तलाशी के दौरान तमंचा और कारतूस बरामद कर लिए। पुलिस ने आरोपी को जेल भेजने के साथ ही न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश सत्य प्रकाश ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने तथा गवाह के बयान एवं पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद पुलिस द्वारा फर्जीवाड़ा करके तमंचा लगाना पाया। फर्जीवाड़ा इस तरह माना गया क्योंकि जो तमंचा आरोपी पर बरामद दिखाया गया था उसी असलाह (तमंचा) को इससे पूर्व वर्ष 2010 में एक आरोपी से बरामदगी दिखाई जा चुकी थी। यह तथ्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में सामने आया था। आरोपी शिटटू से तमंचा, कारतूस की फर्जी बरामदगी में थाना शिकोहाबाद के तत्कालीन एसएचओ वीके तिवारी, उपनिरीक्षक रामबाबू पाठक, सिपाही राजीव, संजीव, शरद, बृजेश को दोषी पाते हुए इन सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।