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अधूरा कोर्स बन रहा स्कूलों के लिए परेशानी का सबब

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फिरोजाबाद। कोरोना काल में माध्यमिक विद्यालयों की बंदी का असर 60 प्रतिशत बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। यह वह छात्र हैं, जो स्कूल बंदी के दौरान खराब स्मार्ट फोन की सुविधा उपलब्ध न होने से ऑनलाइन कक्षाओं से नहीं जुड़ सके हैं। अब कोर्स पूरा करना शिक्षक और विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक की ऑफलाइन कक्षाएं चल रही हैं।
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छात्र और शिक्षकों से अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर छूटे हुए कोर्स को पूरा करने की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें बोर्ड परीक्षा की तैयारियों को चिंता सताने लगी है। कुछ विद्यालयों ने कोर्स पूरा कराने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं शुरू कर दी हैं। मगर बचे हुए समय में कोर्स पूरा कराना एक चुनौती बन गया है। डीआईओएस बालमुकुंद प्रसाद का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए अतिरिक्त कक्षाएं चला सकते हैं। ऑनलाइन भी कक्षाएं नियमित चलाएं। ताकि कोर्स अधूरा न रहे।
क्या कहते हैं शिक्षक
- कोरोना काल में कई विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन, इंटरनेट की समस्या रही। जिन विद्यार्थियों ने ऑनलाइन पढ़ाई कि वह भी कह रहे हैं कि ऑनलाइन क्लास समझ नहीं आई। इन विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाएं भी देनी है। ऐसे में पूरा कोर्स कराने के लिए अतिरिक्त कक्षाएं जरूरी हैं।
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पंकज भारद्वाज - शिक्षक तिलक इंटर कॉलेज
- ऑनलाइन कक्षाओं से हो चुकी पढ़ाई को बच्चे फिर से दोहराने की मांग कर रहे हैं। इनमें तमाम ऐसे बच्चे हैं, जो ऑनलाइन कक्षाओं से वंचित रह गए थे। शिक्षकों से ऐसे बच्चों को एक बार फिर से पढ़ाने को कहा है। हालांकि दोबारा और पूरा कोर्स कराना चुनौती है। क्योंकि लंबा समय कोरोना काल में चला गया।
डॉ. अजय सिंह- प्रधानाचार्य गोपनीनाथ इंटर कॉलेज
छात्रों की बात
हमने शिक्षकों से अनुरोध किया है कि कोर्स की मुख्य बातें एक बार फिर से पढ़ाएं। ताकि समय रहते हम अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर बोर्ड में अच्छे नंबरों से पास हो सकें।
रजनीकांत - छात्र
नेटवर्क समस्या के कारण मैं ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाया। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि कक्षाओं में एक बार फिर से अध्याय दोहराया जाए। जिसमें हम अपना कोर्स पूरा कर सकें।
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मयंक - छात्र
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