फिरोजाबाद। पंचायत चुनाव में चक्रानुक्रम आरक्षण प्रणाली लागू किए जाने से हर किसी के होश उड़ गए। क्योंकि वर्तमान में जो प्रधान का चुनाव लड़े उन पंचायतों का आरक्षण बदलने के कारण अब दोबारा से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। शासन की आरक्षण प्रणाली के चलते प्रधान, ब्लाक प्रमुख एवं जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का सपना देखने वालों को एक बार फिर आरक्षण प्रणाली के फाइनल होने तक का इंतजार करना पड़ेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी गांवों में शुरू हो गई। वर्तमान प्रधानों ने चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली। उन्हें पता था कि शायद उनकी पंचायत लंबे अर्से से आरक्षित रही तो अब अनारक्षित हो जाए। प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में चक्रानुक्रम आरक्षण प्रणाली को लागू रखने का फैसला लिया है। इस प्रणाली के चलते प्रत्येक पंचायत में प्रधान का पद कभी सामान्य वर्ग, कभी एससी, ओबीसी तो कभी एसटी के लिए आरक्षित होती रहेगी।
यह नियमावली सिर्फ प्रधान, बीडीसी सदस्य एवं ब्लाक प्रमुख पद ही नहीं बल्कि जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर लागू होगी। चक्रानुक्रम आरक्षण प्रणाली के लागू होने के बाद उनके होश उड़ गए जो अभी तक जिला पंचायत के वार्ड सदस्य पद की न सिर्फ तैयारी कर रहे थे बल्कि गाड़ियों में बैनरों को लगाकर गांवों में प्रचार करना शुरू कर दिया था। उनकी निगाह अब आरक्षण प्रणाली के फाइनल होने तक जिला प्रशासन की ओर टिकी रहेगी।
पंचायतों के पद एक नजर में.......
जिला पंचायत अध्यक्ष-एक
जिला पंचायत सदस्य-33
क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद-नौ
क्षेत्र पंचायत सदस्य-817
ग्राम प्रधान के पद-574
पंचायत चुनाव के आरक्षण में चक्रानुक्रम प्रणाली के लागू किए जाने के कारण प्रधान, बीडीसी, ब्लाक प्रमुख जिला पंचायत सदस्य पद की आरक्षण प्रणाली वर्तमान के सापेक्ष बदलने की उम्मीद है। आरक्षण फाइनल होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सी पंचायत का प्रधान पद किसके लिए आरक्षित या फिर अनारक्षित होगा। -नीरज कुमार सिन्हा, जिला पंचायत राज अधिकारी फिरोजाबाद।