आगरा के थाना सदर के अंर्तगत बुंदू कटारा 37/46 ई निवासी रविंद्र कुमार 2006 से ऑर्डनेंस व जून 2009 से ऑर्डनेंस फैक्ट्री हजरतपुर में चार्जमैन पद पर कार्यरत था। यूपी एटीएस को सूचना मिली की हजरतपुर ऑर्डनेंस फैक्ट्री में तैनात रविंद्र कुमार फेसबुक पर दोस्त बनीं एक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की एजेंट को संवेदनशील व गोपनीय जानकारियां भेज रहा है।
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आगरा यूपी एटीएस की टीम ने उसे आगरा स्थित उसके आवास से हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही 13 मार्च को आरोपी से पूछताछ के लिए लखनऊ ले जाया गया। पूछताछ में आरोपी रविंद्र कुमार ने पाकिस्तान खुफिया एजेंसी को भेजी गई गोपनीय जानकारियां देने की बात स्वीकार की।
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यूपी एटीएस ने आरोपी द्वारा भेजी गईं पाकिस्तान को गोपनीय जानकारी से अवगत कराने के बाद उसके खिलाफ शासकीय गोपनीय अधिनियम 1923 की धारा 148 बीएनएस के तहत लखनऊ में मुकदमा दर्ज करने के साथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी रविंद्र ने पूछताछ में बताया कि वह मालामाल होने के लालच में ऑर्डनेंस फैक्ट्री की गोपनीय जानकारियां भेजता था। उसने पूछताछ में यह भी बताया कि अक्सर दोनों के बीच बातें खत्म होने के बाद चैट को फोन से डिलीट कर देता था। मामले में ओईएफ का कोई भी अधिकारी फोन रिसीव नहीं कर रहे।
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रविंद्र से मिलीं ये गोपनीय जानकारी
एक दस्तावेज वर्ष 2024 के ऑर्डनेंस फैक्टरी हजरतपुर व एक 2025 की प्रतिदिन प्रोडक्शन रिपोर्ट, जिसमें ड्रोन से संबंधित और गगनयान इसरो भारत सरकार के प्रोजेक्ट एवं अन्य गोपनीय जानकारी है। एक ओवरवेशन स्टोर से संबंधित दस्तावेज है, एक प्रोडक्शन संबंधी स्क्रीनिंग कमेटी का गोपनीय पत्र, बेहिसाब स्टॅाक के लिए लंबित मांग सूची है। एक गोपनीय मीटिंग की अस्वीकृत फाइल, जिसमें ऑर्डनेंस फैक्टरी के वरिष्ठ अधिकारियों एवं 51 गोरखा राइफल के अधिकारियों के देहरादून में लॉजिस्टिक ड्रोन के ट्रायल करने संबंधी वार्ता से संबंधित गोपनीय दस्तावेज हैं।