प्रशासनिक लापरवाही और धीमी क्रियान्वयन नीति के चलते जिले की कई इमारतें उद्घाटन की बाट जो रही हैं। शहर की स्वास्थ्य सेवाओं की आस बना सरकारी ट्रामा सेंटर भी शुभारंभ की बाट जोह रहा है तो वहीं सौ शैय्या अस्पताल भी आगाज के इंतजार में है। बेहतर इलाज का सपना अभी पूरा होते नहीं दिख रहा। करोड़ों बजट मिलने के बाद भी जिले में स्वास्थ्य योजनाओं की गति भी धीमी है। उपकरणों का अभाव मरीजों को बेहतर इलाज नहीं दिला पा रहा है।
100 बिस्तरों के महिला अस्पताल को नहीं है बजट
महिला शिशु कल्याण विभाग में 100 बिस्तरों के महिला वार्ड के लिए 19 करोड़ 33 लाख 54 हजार रुपये मिले थे। इसका श्रेय लेने की होड़ रही लेकिन इसे सांसद अक्षय यादव की देन बताया गया। यह अस्पताल जनवरी 2016 तक पूर्ण होना है लेकिन एक किस्त रुकने की वजह से निर्माण अधर में लटक गया है। अभी भी महिला अस्पताल को 13 करोड़ 47 लाख रुपयेे मिलने का इंतजार है।
उपकरणों की कमी से रुका ट्रामा सेंटर
ट्रामा सेंटर निर्माण में एक करोड़ 50 लाख 71 हजार रुपये स्वीकृत हुआ है। करोड़ों की लागत से भवन तो तैयार है लेकिन स्टाफ और उपकरणों की कमी से सरकारी ट्रामा सेंटर शुरू नहीं हो सका है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग भी यह नहीं बता पा रहा कि सरकारी ट्रामा सेंटर कब तक शुरू होगा।
आईसीसीयू यूनिट का कार्य है धीमा
जिले में आईसीसीयू यूनिट का निर्माण व सेंट्रल ड्रग स्टोर के लिए 1 करोड़ 10 लाख 18 हजार रुपये का बजट मिल चुका है। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए जून 2016 तक का समय है लेकिन पैक्सपेड संस्था के कार्य की काफी धीमी गति है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग पैक्सफेड संस्था के खिलाफ शासन को लिखेगा।
मरीज खाते हैं धक्के
महिला अस्पताल की ओपीडी में एक कमरे में चार चिकित्सक बैठते हैं। मरीजों को धक्के खाने पड़ते हैं। जबकि ओपीडी स्टेंशन सर्विस एवं लाउंड्री निर्माण को 95 लाख 76 हजार का बजट मिल चुका है। नई ओपीडी के भी जून 2016 तक शुरू होने का इंतजार रहेगा।
नगर विधायक ने लिखा है प्रमुख सचिव को पत्र
नगर विधायक मनीष असीजा ने भी जिला अस्पताल के सौंदर्यीकरण को प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है। उन्होंने अस्पताल की बाउंड्री का टूटा हिस्सा और चिकित्सकों के जर्जर आवासों को ठीक कराने के लिए शासन से मांग की है।