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फिरोजाबादः नारखी में पेट्रोल पंप के कमरे में मैनेजर और सेल्समैन की मौत, पुलिस जांच में जुटी

Fri, 02 Jan 2026 01:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद के थाना नारखी क्षेत्र स्थित पेट्रोल पंप पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब संदिग्ध हालत में  मैनेजर और सेल्समैन की मौत हो गई। दोनों के शव कमरे में मिले हैं।
 
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मृतकों के फाइल फोटो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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फिरोजाबाद के थाना नारखी क्षेत्र के नगला सोंठ स्थित एक पेट्रोल पंप के कमरे में सो रहे मैनेजर और सेल्समैन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण कमरे में भरे जनरेटर के धुएं से दम घुटना बताया जा रहा है। शुक्रवार सुबह पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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पुलिस के अनुसार, जनपद इटावा के थाना वैदपुरा स्थित रूपपुरा निवासी मोहित (25) पुत्र राजेंद्र सिंह पेट्रोल पंप पर मैनेजर के पद पर तैनात था। वहीं, दूसरा युवक सागर पुत्र चंद्रपाल निवासी रूपपुरा, वैदपुरा, इटावा भी इसी पंप पर सेल्समैन का कार्य करता था। बृहस्पतिवार की रात दोनों युवक पंप परिसर में बने एक ही कमरे में सोए हुए थे। इनके साथी रवि ने बताया कि वह दूसरे कमरे में सो रहा था। शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे तक जब मोहित और सागर कमरे से बाहर नहीं निकले, तो उन्हें जगाने की कोशिश की। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और खिड़की से पानी डालने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, तो अनहोनी की आशंका हुई।


उसने तत्काल पंप मालिक कुलदीप को सूचना दी, जिन्होंने पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब कमरे का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर दोनों युवक अचेत अवस्था में मिले। पास ही जनरेटर रखा हुआ था, जिससे निकले धुएं और कार्बन मोनोऑक्साइड की वजह से दम घुटने की बात सामने आ रही है। पुलिस ने तुरंत दोनों को अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीओ टूंडला अमरीश कुमार ने बाताया कि प्रथम दृष्टया मामला दम घुटने का लग रहा है। मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
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पुलिस ने दिखाई सक्रियता पर एम्बुलेंस की संवेदनहीनता आई सामने
मैनेजर और सेल्समैन की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। साथी कर्मचारी रवि के मुताबिक, यदि समय पर इलाज मिल जाता तो दोनों युवकों की जान बच सकती थी। कर्मचारी रवि के अनुसार, जिस वक्त एम्बुलेंस आई, मोहित और सागर की सांसें चल रही थीं। उम्मीद थी कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया जाएगा, लेकिन आरोप है कि एम्बुलेंस कर्मी पुलिस केस की बात कहकर दोनों युवकों को मौके पर ही छोड़कर चले गए। जीवन बचाने के बजाय एम्बुलेंस का इस तरह जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। एम्बुलेंस के जाने के बाद पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को समझा और तत्काल दोनों युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। काफी देर तक पंपिंग थेरेपी (सीपीआर) दी गई, लेकिन फेफड़ों में जनरेटर का जहरीला धुआं ज्यादा भर जाने के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया।


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