बैठक करते रामलीला महोत्सव के पदाधिकारी।
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सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनगर रामलीला महोत्सव के स्थान से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार यानी कल का दिन तय किया है। कोर्ट ने इस मामले को लोगों की आस्था और रामलीला से जुड़ा हुआ बताते हुए याचिका पर तुरंत सुनवाई का फैसला लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ में श्रीनगर रामलीला महोत्सव कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है। पदाधिकारियों ने आपात बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिलती है तो इस बार की रामलीला का आगे मंचन नहीं किया जाएगा।
शहर के संवाले प्रसाद रोड निवासी प्रदीप राना ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर परिषदीय विद्यालय प्रांगण में हो रही रामलीला से बच्चों की पढ़ाई बाधित होने का हवाला दिया था। इस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए आयोजन को बंद करने के आदेश जारी किए थे, कोर्ट के आदेश के बाद एसडीएम अंकित वर्मा, सीओ अमरीश कुमार ने सोमवार देर रात मौके पर पहुंचकर आठ दशक पुरानी प्रसिद्ध श्रीनगर रामलीला का मंचन बंद कर दिया था। इसको लेकर रामलीला महोत्सव के पदाधिकारी डीएम रमेश रंजन से मिले थे, यहां डीएम के अन्य स्थान पर रामलीला कराए जाने के प्रस्ताव पर उन्होंने रामलीला मैदान के बाहर सत्यम पार्क में रामलीला करने कि बात को स्वीकार कर लिया था।
इधर रामलीला मैदान के बाहर सत्यम पार्क (जो मात्र फुटपाथ हैं) समुचित स्थान न होने एवं प्रमुख मार्ग स्टेशन रोड होने के चलते आवागमन में लोगों को परेशानी होने व जाम लगने की स्थिति को देखते हुए कमेटी के पदाधिकारी, सदस्यों व शहर की जनता ने रामलीला मैदान के बाहर मंचन करने से इन्कार कर दिया है। इसके साथ ही बैठक आयोजित कर सर्वसहमति ने निर्णय लिया हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलती है तो रामलीला आगे नहीं की जाएगी और यह रामलीला तब तक नहीं होगी जब तक बरसों से चले आ रहे स्थान पर रामलीला की अनुमति नहीं मिल जाती।
बैठक में रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कृष्णा हरेंद्र पाल सिंह परमार, संयोजक जयजीव पाराशर, द्विजेन्द्र विक्रम सिंह परमार, महामंत्री रघु धाकरे, कोषाध्यक्ष अमित पाठक, लीला व्यास रामप्रिया शरण, राजीव दुबे, सत्येंद्र गुप्ता बबलू, मनोज परमार, हर्षवर्धन सिंह परमार, सुशील पोनिया आदि शमिल रहे।
श्रीराम की बरात जनकपुरी पहुंची, नहीं हुआ विवाह की लीला का मंचन
श्रीराम की बरात मंगलवार देर रात को जनकपुरी पहुंच गई। मगर बुधवार को माता सीता-राम के विवाह की लीला का मंचन नहीं हुआ। दरअसल, कमेटी ने आयोजन को फिलहाल बंद कर दिया है।