फिरोजाबाद। लॉकडाउन के दौरान लोग घरों में कैद हैं। जरूरत के सामान तक के लिए परेशान हैं, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत उन्हें हो रही है जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में ओपीडी भी बंद हैं। कई चिकित्सकों ने इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर रखी हैं।
ऐसे में बीमार लोगों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन घरों में ही कराह रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जिन्हें उपचार के लिए दूसरे जनपदों के अस्पतालों में जाना है। किंतु जिले की सीमाएं सील होने के कारण वे कहीं नहीं जा सते हैं। उनके परिजन मदद के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं।
नहीं लगे कुत्ता काटे के इंजेक्शन
सरस्वती नगर निवासी ऊषा सक्सेना ने बताया कि कुत्ते ने काट लिया था। एआरबी लगवाने के लिए अस्पताल गए, किंतु अस्पताल में मना कर दिया। अन्य मेडिकल स्टोर पर गए, यहां भी वैक्सीन नहीं मिली है। बिना वैक्सीन लगे हमेशा मन में यही लगा रहता है कि कहीं बीमारी बड़ा रूप न धारण कर ले।
कीमों के लिए जाना है, किंतु नहीं बन रही व्यवस्था
दुर्गा नगर निवासी मोहित अग्रवाल ने बताया कि मां को कैंसर है। कीमों के लिए दिल्ली एम्स में जाना है। लेकिन जनपद और दिल्ली की सीमाएं सील होने की खबरें आ रही हैं। जाएं भी और अस्पताल तक पहुंच न पाएं तो बड़ी मुश्किल होगी। कीमो समय से न हो तो दिक्कत खड़ी हो जाती है। एडीएम कार्यालय से पास बनवाने के लिए गया। कई घंटे बैठा रहा, किंतु कोई समाधान नहीं निकला।
मां को हो गया इंफेक्शन, कैसे जाएं आगरा
टूंडला निवासी मधु का कहना है कि मां का ऑपरेशन कुछ दिन पहले हुआ था। नियमित ड्रेसिंग नहीं हो सकी, इसलिए इंफेक्शन नहीं हो सका है। आगरा में चिकित्सक को दिखाने के लिए जाना है। घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिल रही है और न ही कोई वाहन चालक तैयार हो रहा है। सरकारी अस्पताल में भी कोई इलाज नहीं मिल रहा है। लॉकडाउन में यह विकराल समस्या आ खड़ी है।
मुंह से निकल रहा खून, नहीं मिल रहा इलाज
रामनगर निवासी अनुराधा कुमार ने बताया कि उनके पति को खांसी के साथ खून निकल रहा है। पहले प्राइवेट चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने दवा लिख दी। अब वह चिकित्सक भी नहीं बैठ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज गए, किंतु वहां कह दिया कि ओपीडी बंद हो गई है। ट्रामा सेंटर में गए तो वहां भी कह दिया बाद में आना। ऐसे में यह रोग और बढ़ जाएगा। इलाज न मिलने से पूरा परिवार चिंतित है।
आईएमए की हेल्पलाइन नंबर पर ले रहे सेवा
आईएमए द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर इमरजेंसी में चिकित्सकों से सलाह ली जा सकती है। आईएमए अध्यक्ष डॉ. मनोज जिंदल ने बताया कि हेल्पलाइन पर 30 से 35 मरीजों के प्रतिदिन फोन आ जाते हैं। कई फोन ऐसे हैं, जिनका आपरेशन हुआ है और बाद में दिक्कत होने लगी है। हमने दवा बताई तो कुछ लोगों के सामने समस्या आई कि दवा नहीं मिल रही है। हमने उन मेडिकल स्टोर के नंबर भी उपलब्ध कराए, जिन्हें प्रशासन ने दवा वितरण की अनुमति प्रदान की है।
शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि कोई इमरजेंसी सेवा में इलाज कराना चाहता है तो पुलिस भी उसे नहीं रोकेगी। वह डॉक्टर का पर्चा लेकर इलाज कराने जा सकता है। मगर सामान्य चेकअप और ऐसी बीमारी, जिन्हें 10 से 15 दिन बाद टाला जा सकता है तो उन सेवाओं पर रोक लगाई है। जनपद के सभी सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं चालू हैं।
- डॉ. एसके दीक्षित, सीएमओ।