फिरोजाबाद। स्वास्थ्य विभाग भले ही सरकारी अस्पतालों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शासन से थोक में कई ऐसी मशीनें भेजी जा रही हैं, जो मेडिकल कॉलेज आने के बाद शोपीस बन जाती हैं। लेकिन, दंत रोग विभाग में एक्सरे मशीन नहीं हैं। आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकों को बीच-बीच में इलाज रोककर एक्सरे कराने के लिए भेजना पड़ता है। मुफ्त इलाज के लिए सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को जांच के लिए कई बार बाहर से भी एक्सरा कराना पड़ता है।मेडिकल कॉलेज के दंत रोग विभाग में 60 से 70 मरीज दांत की समस्या वाले होते हैं। दंत रोगियों के मसूड़े व अन्य समस्याओं को एक्सरे कराने की आवश्यकता पड़ती है। कई बार चिकित्सक एक्सरे कराते हैं, लेकिन दंत अस्पताल में एक्सरे मशीन ही नहीं है। इस कारण मरीजों को सामान्य एक्सरे कराना पड़ता है, या फिर निजी क्लीनिकों में फीस देकर एक्सरे करवाने पड़ रहे हैं। बाहर से जांच कराने में मरीजों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज में 15 एक्सरे मशीन स्थापित हैं, जो शोपीस बनी हैं।
मेडिकल कॉलेज में बछगांव से आए राधेश्याम ने बताया कि उनकी पत्नी के दांत में दर्द था। चिकित्सक ने बताया कि अंदर मसूड़े में सूजन है। इसके लिए एक्सरा कराना पड़ेगा, लेकिन अस्पताल में दंत रोग विभाग में एक्रे मशीन नहीं है। अब बाहर से एक्सरे कराने को कह दिया है। इसी तरह जैन नगर से आए वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि दंत रोग विभाग में एक्सरे नहीं है। जबकि प्राइवेट पर जाओ तो तुरंत एक्सरे कराकर चिकित्सक उपचार शुरू कर देते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवीन जैन ने बताया कि दंत रोग विभाग की एक्सरे मशीन जल्द ही विभाग में स्टॉल करा दी जाएगी। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। मशीन मिलने पर मरीजों को मुफ्त में एक्रे की सुविधा दी जाएगी।