फिरोजाबाद। राशन के चावल की अवैध रूप से खरीद कर हरियाणा, दिल्ली की मंडियों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने वाले चावल माफिया पंकज अग्रवाल के खिलाफ जिला पूर्ति विभाग में तैनात नगर क्षेत्र के एआरओ मनोज गहराना ने मंगलवार को तहरीर दी। उत्तर थाना पुलिस को दी गई तहरीर में गंभीर आरोप माफिया पर हैं। पुलिस के अनुसार तहरीर प्राप्त हो गई है। केस दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।
बता दें कि एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह द्वारा 11 अक्तूबर को ककरऊ कोठी के पास से 335 क्विंटल राशन के चावल से लदे ट्रक को पकड़ा था। ट्रक चालक से पूछताछ हुई तो यह चावल माफिया पंकज अग्रवाल का निकला। इसको पूर्व में भी कई बार पकड़ा जा चुका है। मटसैना थाने में तीन साल पहले भी पंकज अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। चावल पकड़े जाने के बाद एसडीएम ने इसे पूर्ति विभाग और मंडी सचिव की सुपुर्दगी में दे दिया था। पंकज अग्रवाल ने चावल पर दावा करते हुए कहा था कि उसने मंडी से चावल की खरीद की थी। डीएम रमेश रंजन ने जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी के अध्यक्ष एडीएम वित्त एवं राजस्व विशु राजा ने चावल खरीद के साक्ष्य पेश करने के लिए पंकज को अवसर दिया। मगर, पंकज दुरुस्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इस पर एडीएम की कमेटी में शामिल पूर्ति विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग, मंडी परिषद और जीएसटी के अधिकारियों ने मुकदमे की सिफारिश की। एआरओ मनोज गहराना ने बताया कि मामले में जांच के आधार पर पंकज अग्रवाल के खिलाफ थाना उत्तर पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दे दी है। सीओ सिटी प्रवीण तिवारी ने बताया कि मामले में तहरीर प्राप्त हो गई है। मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई थाना स्तर से की जा रही है। जांच में जिन-जिन लोगों के नाम सामने आएंगे उनको भी मुकदमे में शामिल किया जाएगा और इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई होगी और संपत्ति को भी प्रशासन कुर्क करेगा।
बड़ा सवाल, आखिर कहां लगाता है पंकज अग्रवाल सेंध
डीएम द्वारा गठित कमेटी की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पंकज अग्रवाल खुद को आढ़ती बताता है। वह राशन के चावल की खरीद फरोख्त कर उसे दिल्ली, हरियाणा में ले जाकर बेचता है। मगर, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पंकज अग्रवाल राशन का चावल कहां से प्राप्त करता है। क्या वह गांव-गांव अपने गिरोह के लोगों को बेचकर सीधे राशन उपभोक्ताओं से इस चावल की खरीद करता है या फिर उसने सरकारी सिस्टम में ही सेंध लगा रखी है, जहां से उसे राशन डीलर या फिर अन्य किसी स्रोत से राशन का चावल सस्ते दाम में प्राप्त होता है। यह सवाल पुलिस की जांच में ही सुलझ सकेगा।