फीरोजाबाद। सुहागनगरी के औद्योगिक क्षेत्र को तरक्की की राह पर यूपीएसआईडीसी आगे नहीं बढ़ा सकी। यूं तो विभाग ने छोटी बड़ी करीब 250 इकाइयों की स्थापना को जलेसर रोड पर भूखंड आवंटित किए लेकिन एक दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद आधा दर्जन से अधिक इकाइयां ही स्थापित हो सकीं। विभाग करीब इस क्षेत्र में 65 इकाइयों के संचालन का दावा कर रहा है।
सुहागनगरी में नए उद्योगों की स्थापना को उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम की ओर से भी पहल की गई। निगम की ओर से शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर जलेसर रोड पर स्थित एक बड़े भूखंड पर औद्योगिक हब बनाने की प्लानिंग की। छोटे बड़ी करीब 250 भूखंडों का आवंटन कर दिया। भूखंडों के आवंटन में उद्यमियों ने काफी रुचि दिखाई लेकिन उद्योगों को स्थापित करने की ओर ध्यान नहीं दिया। उद्योगों की स्थापना पर जिला प्रशासन ने आवंटित भूखंड स्वामियों पर जोर दिया लेकिन सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया। क्योंकि सुरक्षात्मक लहजे से पुलिस फोर्स नहीं रहता है। विद्युत उपकेंद्र स्थापित है लेकिन स्टाफ नहीं रहने के कारण उद्योग तो दूर क्षेत्रीय नागरिकों तक को भरपूर बिजली नहीं मिल पाती। इसके साथ ही आवागमन के भी साधनों में काफी दिक्कत है। यही सब कारण है कि उक्त भूमि पर उद्योगों की स्थापना नहीं हो सकी। शहरी क्षेत्र की घनी आबादी में संचालित होने वाली पकाई भट्ठियों का संचालन यहां कराने की प्लानिंग की गई। लेकिन यह भट्ठियों भी चालू नहीं हो सकी। इसका बड़ा कारण शहर के अंदर फैलने वाले प्रदूषण को समाप्त करना था। गेल के द्वारा गैस की पाइप लाइन बिछाने के बाद उद्यमियों ने अब कारखानों को स्थापित करने का काम शुरू किया है। वर्तमान में यदि देखें तो करीब चार कारखाने स्थापित करने को बाउंड्रीवाल बनाने का काम चल रहा है। इसके साथ ही छोटे उद्योग भी स्थापित होने लगे। प्रशासन यदि समय रहते व्यवस्थाओं पर ध्यान दे तभी सुहागनगरी में भी एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो सकेगा।
काफी पुरानी एवं उखड़ गई सड़कें
यूपीएसआईडीसी की ओर से बनाई गई सड़कें खस्ताहाल हो गईं। काफी गहरे-गहरे गड्ढे हो गए। गुणवत्ता इतनी खराब की गिट्टियां तक उखड़ गईं। औद्योगिक इकाइयों के स्थापित नहीं होने के कारण यहां ग्रामीण पशुओं के लिए चारागाह के रूप में प्रयोग करते हैं।
भूखंड आवंटन करके पल्ला झाड़ा
यूपीएसआईडीसी ने भूखंड आवंटन करने के साथ ही यहां उद्योग लगें या नहीं इस ओर ध्यान नहीं दिया। प्रशासन ने अवश्य उद्यमियों एवं व्यापारियों पर उद्योग स्थापित को काफी पहल की। वर्तमान जिलाधिकारी ने भूखंड आवंटन तक निरस्त करने की चेतावनी दी।
कांच उद्योग विकास केंद्र बदहाल
जलेसर रोड पर कांच उद्योग में निखार लाने को यूं तो कांच उद्योग विकास केंद्र स्थापित किया लेकिन हकीकत में यदि देखें तो यह केंद्र मात्र शोपीस साबित हो रहा है। उद्यमियों की मानें तो कांच उद्योग को यह केंद्र कोई भी नई तकनीक नहीं दे सका।