सिंधी कालोनी में आयोजित श्रीराम कथा रविवार को आचार्य पं. दिनेशजी ने विश्वामित्र के साथ दशरथ पुत्र श्रीराम, लक्ष्मण द्वारा जनकपुरी भ्रमण आदि की मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की लीलाओं को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
आचार्य श्री ने कहा कि श्रीराम, लखन गुरू विश्वामित्र से आज्ञा लेकर नगर दर्शन के लिए जाते हैं। तभी मिथिलापुरी के नर-नारी श्रीराम का स्वरूप देखकर दंग रह जाते हैं। वहां की स्त्रियां राम, लखन का रूप देखती है तो माता गौरी से प्रार्थना करतीं है कि हे मां! इन्हीं राजकुमारों के कर कमलों से वह शिव-धनुष यदि टूट जाए तो सीता-राम को अपने वर और लक्ष्मण को देवर के रूप में वरण कर लेंगी। दोनों भाई पुष्पवाटिका में गुरु की आज्ञा लेकर गुरु की पूजा-अर्चना के लिए पुष्प लेने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुष्प वाटिका में सीताजी अपनी सहेलियों सहित गौरी पूजन को जाती हैं तो दोनों भाई पुष्प तोड़ने के लिए गए तो वहां सीता राम की पहली मुलाकात हो जाती है। इधर, राजा जनक ने सीता स्वयंवर की घोषणा करते हुए कहा कि जो भी राजा शिवजी के धनुष को उठाएगा। वह उसके साथ सीता का विवाह कर देंगे। इसको लेकर विभिन्न देशों के राजाओं को धनुष यज्ञ के लिए आमंत्रित किया गया। धनुष यज्ञ में जब किसी भी देश का कोई भी राजा धनुष को उठाना तो दूर की बात उसे हिला भी नहीं सका, तब राजा जनक चिंतित हो उठे। इसके बाद विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने धनुष को उठा लिया तथा प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया। धनुष के टूटते ही श्रीराम की जय-जयकार होने लगी। इसके बाद सीताजी ने श्रीराम के गले में वर माला डाली।