शिकोहाबाद। जेएस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की राजस्थान के जयपुर की एसओजी टीम ने गिरफ्तारी की। इसके बाद शिक्षा जगत के गलियारों में खलबली मच गई है। राजस्थान में पकड़ी गईं फर्जी डिग्रियों की जांच में एसओजी जयपुर बड़े गैंग का खुलासा करने में जुट गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य इलाकों में फर्जीवाड़ा करने वालों के तार जुड़े हुए हैं। इनकी पुलिस तलाश में जुटी हुई है।
गोरखपुर का व्यक्ति भी हुआ था फर्जी डिग्री के नाम पर ठगी का शिकार
एक माह पूर्व गोरखपुर जनपद से पुलिस ने गोरखपुर की बेलवार पीएचसी में तैनात आयुष डॉक्टर राजेश कुमार एवं संत कबीरनगर कोतवाली क्षेत्र के डॉक्टर के सहयोगी सुशील कुमार चौधरी को जेल भेज चुकी है। आरोपी डॉक्टर फर्जी डिग्रियां बनवाने के गैंग का को-ऑपरेटर था, जोकि लोगों को लालच देकर फर्जी डिग्रियां बनवाता था। डॉक्टर ने ही उरुवा के सूर्यप्रताप सिंह को शिकोहाबाद में उसके परिचित का एक कॉलेज होने की जानकारी देकर 80 हजार रुपयों में डी-फार्मा की फर्जी डिग्री बनवाई थी। बिना परीक्षा दिए डिग्री मिलने पर पीड़ित ने शिकोहाबाद आकर पड़ताल की, तो डिग्री को फर्जी बताया गया। जिसके बाद पीड़ित ने मुकदमा दर्ज कराया था।
यह था मामला, खुलासे के बाद ऐसे हुई कार्रवाई
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 16 जून 2022 को पीटीआई थर्ड ग्रेड की भर्ती निकाली थी। इसकी परीक्षा 25 सितंबर 2022 को हुई। इसका अक्तूबर माह में वर्ष 2022 में परिणाम घोषित हुआ था। इसमें ऑनलाइन फॉर्म के सत्यापन में विसंगतियां मिली थीं। इसके बाद डीईओ आरडी बंसल ने इस मामले में फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी प्राप्त करने वाले चार अभ्यर्थियों को नोटिस देकर उनकी सेवाएं समाप्त की थीं।
इन अभ्यर्थियों के पास थी जेएस विवि की डिग्री
केस-1
राजस्थान उच्च प्राथमिक विद्यालय गाजीपुर नदबई के पीटीआई सौरभ उपाध्याय ने परिणाम के कॉलम में रिजल्ट अवेटेड/एपियरिंग एवं उत्तीर्ण होने का वर्ष तथा प्रतिशत के कॉलम में नहीं दर्शाया था। जबकि दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसी जेएस यूनिवर्सिटी की बीपीएड की चतुर्थ सेमेस्टर की 2 अंकतालिकाओं में दोनों में तिथि अलग थी।
केस-2-
राजस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय गढ़ी जालिम सिंह की पीटीआई बुलकेश कुमारी ने 22 जुलाई 2022 को आवेदन में रिजल्ट अवेटेड/एपियरिंग होना बताया था, दस्तावेज सत्यापन में रोल नंबर एवं सत्यापन के समय रोल नंबर अलग था। उत्तीर्ण होने का वर्ष 2019 बताया गया था। आवेदन के बाद बैक डेट में डिग्री प्राप्त की गई थी।
केस-3-
राजस्थान उच्च प्राथमिक विद्यालय घसोला (बहनेरा) सेवर की पीटीआई प्रियंका परिणाम के कॉलम में वर्ष 2021 एवं प्रतिशत कॉलम में 67.47 प्रतिशत दर्शाया, उत्तीर्ण होने का वर्ष 23 अगस्त 2019 दर्शाया गया। चतुर्थ सेमेस्टर 23 अगस्त 2019 को जारी हुआ। आवेदन के समय 22 जुलाई 2022 को गलत रोल नंबर दिखाया गया है।
केस-4-
राजस्थान उच्च प्राथमिक विद्यालय दयोपुरा की पीटीआई सुनीता देवी धायल ने वर्ष 2021 में उत्तीर्ण होने एवं प्रतिशत कॉलम में 69.3 प्रतिशत दर्शाया। आवेदन के बाद बैक डेट में डिग्री प्राप्त की है। अभ्यर्थी के चारों सेमेस्टर के रोल नंबर भी एक समान है। जेएस वि.वि के माइग्रेशन सर्टिफिकेट 13 अगस्त 2024 को जारी किया गया। शिक्षा अधिकारियों के अनुसार बिना माइग्रेशन सर्टिफिकेट के डिग्री जारी करना अवैध होता है।
वर्जन
चारों अभ्यर्थियों के पास जेएस यूनिवर्सिटी की डिग्रियां थीं। इसके आधार पर पिछले 16 माह से पीटीआई की नौकरी कर रहे थे। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान चारों के दस्तावेजों में विसंगतियां पाई गई थीं। इसके चलते इन्हें नोटिस देकर इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। - रामेश्वर दयाल बंसल, जिला विद्यालय निरीक्षक, भरतपुर राजस्थान
वर्जन
हमारे यहां राजस्थान के जयपुर से एसओजी टीम आई थी। जिसने नंदन मिश्रा को गिरफ्तार किया था। इसकी जानकारी थाना शिकोहाबाद में दी गई थी। इसके बाद टीम आरोपी को लेकर जयपुर रवाना हो गई थी। इससे अधिक जानकारी हमारे पास नहीं है। - प्रवीण कुमार तिवारी, सीओ, शिकोहाबाद