फिरोजाबाद। सर्दी का मौसम में हार्ट अटैक के मामले सर्दियों के ज्यादा बढ़ जाते हैं। ऐसे में दिल की खुद देखभाल करना शुरु कर दें। क्योकि स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज को शुरु करीब छह साल गुजर गए। लेकिन लेकिन आज तक हृदय रोग विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में हृदय रोगियों के उपचार की जिम्मेदारी फिजिशियन के कंधे पर ही है। ईसीजी और खून जांच की व्यवस्था तो है, लेकिन गंभीर मरीजों के लिए ईको टेस्ट व सर्जरी की सुविधा नहीं है। गंभीर स्थिति में मरीज सीधे रेफर कर देते हैं।सर्दी का माैसम आते ही उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की समस्या भी बढ़ जाती है। ब्लॉक व तहसील स्तर पर ग्रामीण इलाकों के मरीजों के उपचार के लिए स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई बार स्थिति तो यह होती है कि तत्काल उपचार न मिल पाने की वजह से रास्ते में ही उनकी मौत हो जाती है। वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने की स्थिति में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। यहां फिजिशियन ही प्राथमिक उपचार देते हैं।
आईएमए ने बांटी थी रामवटी
हार्ट अटैक की स्थिति में मरीज को तुरंत उपचार के लिए आईएमए ने रामवटी किट का वितरण की पहल शुरू की थी। हार्टअटैक के प्राथमिक लक्षण में यह दवा लेने से मरीज को खतरे से कुछ समय के लिए बचाया जा सकता है। आईएमए अध्यक्ष डाॅ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि इन दवाओं का संचय जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
हार्ट अटैक के लक्षण
-सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई।
-अचानक से तेज पसीना आना।
-दिल की धड़कन तेज होना।
-बाएं हाथ में दर्द, जबड़े में अकड़न या कंधे में दर्द भी हो सकता है।
-फिजिशियन द्वारा ही हृ़दय बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार किया जाता है। हृदय के गंभीर मरीज उपचार को आते हैं, उन्हें तुरंत रेफर कर देते हैं। ईसीजी की सुविधा अस्पताल में मौजूद हैं। आने वाले समय में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होगी।
डॉ. नवीन जैन, सीएमएस