ग्रामीण अंचल की साफ-सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए बनाई गई सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट स्कीम फाइलों में उलझ गई है। नए वित्तीय वर्ष का डेढ़ माह बीतने के बाद भी योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। किसी भी गांव में न तो बायो गैस प्लांट लगा और न ही गड्ढों आदि के निर्माण का काम ही शुरू कराया गया है।
डीएम विजय किरन आनंद द्वारा मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण अंचल की साफ-सफाई की व्यवस्था में सुधार के लिए सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट योजना की शुरूआत की गई है। योजना के तहत स्वच्छ भारत मिशन के जिला कोआर्डिनेटर राजीव नयन गुप्ता ने 20 गांवों का चयन किया था। गांवों में खाद के गड्ढों का निर्माण कराने, निजी बायोगैस संयंत्रण की स्थापना पर कुल 267.30 लाख रुपये खर्च का प्रावधान था। डीएम की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को शासन ने हरी झंडी दे दी। इसके बावजूद इसका प्रयोग सिर्फ एक गांव में ही किया जाए। लेकिन नए वित्तीय वर्ष का अप्रैल एवं मई माह भी आधा बीत चुका है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। इस कारण यह योजना पूरी तरह से फाइलों में उलझ गई है।
इन गांवों का हुआ था चयन
जमालपुर, वासुदेवपुर, ऊंधनी, रजोपुरा, सिकंदरपुर, दरिगापुर भारौल, पिड़सरा, भादऊ, नगला नथुआ, नगला नौझर, जहांनपुर, गोपालपुर, गढ़ी पुरानी, त्रिलोकपुर, आमौर नगला जीवन, धरमई, बिजौली, कुढ़ी, रहना, गढ़ी निर्भय आदि गांव शामिल है।
सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट स्कीम के तहत पहले 20 गांवों का चयन किया गया था। लेकिन अब एक गांव मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। जमालपुर में शीघ्र ही कार्य की शुरूआत की जाएगी।
राजीव नयन गुप्ता
जिला कोआर्डिनेटर स्वच्छ भारत मिशन।