ऐ सारी कायनात के शहंशाह, ऐ मखलूक के पालने वाले, ऐ जिंदगी और मौत का फैसला करने वाले, ऐ अर्श-ए-आजम के मालिक हम तेरे गुनहगार, खताकार बंदे हैं। हमारे गुनाहों, खताओं को माफ फरमा। ऐ अल्लाह हम अपने अगले-पिछले, गुनाह-ए-सगीरा, गुनाह-ए-कबीरा और तेरे हुक्म की नाफरमानी की माफी मांगते हैं। या अल्लाह हम अपने गुनाहों से तौबा करते हैं। हमारी तौबा कुबूल कर ले। तेरे सिवा कोई इबादत और बंदगी के लायक नहीं और तेरे सिवा कोई तारीफ के लायक भी नही है। मेरे माबूद हमारे गुनाह तेरी रहमत से बड़े नहीं। हमें गुमराही केरास्ते से हटाकर सिरात-ए-मुस्तकीम पर चलने की तौफीक दे। जब तक जिंदा रहे, तब तक हमें ईमान और हक पर रख...आमीन। इस तरह की दुआ शहर की हर मस्जिद से सुनाई दी। मौका था शब-ए-बरात का जब शहर भर में लाखों मुस्लिमों ने इबादत कर हर खास-ओ-आम के लिए दुआ मांगी।
मंगलवार की रात को शहर के मुस्लिम इलाकों में चहलपहल बनी रही। बाद नमाज-ए-इशा से लेकर सुबह फजर तक लोग मसजिद, कब्रिस्तान और सड़कों पर दिखाई दिए। लोगों ने मसजिदों में जाकर पूरी रात नफली इबादत में गुजारी। किसी ने अपने गुनाहों की माफी के लिए दुआ की, तो किसी ने अपने बुजुर्गों को बख्शवाने की। हर कोई बारगाह-ए-इलाही में दुआ करता दिखा। हर कोई इस मुकद्दस और अजीम रात का फायदा उठाना चाहता था। सदर बाजार स्थित जामा मस्जिद, कटरा पठानान में ही स्थित प्राचीन शाही मस्जिद, नगर निगम के सामने स्थित फीरोजशाह के मकबरा, मस्जिद मेवा फरोशां, आगा शाही मस्जिद में इबादत करने वालों की भीड़ लगी हुई थी। इस दौरान प्रमुख सरक्यूलर रोड स्थित कब्रिस्तान, विजय टाकीज के सामने स्थित कब्रिस्तान के साथ ही नगर के ही अन्य कब्रिस्तानों में इबादत की गई।