फिरोजाबाद। वर्ष 2002 से लेकर 2006 के दौरान जिले के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में हुए फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति वितरण और धांधली के जिम्मेदारों पर शासन ने शिकंजा करना शुरू कर दिया है। जिले के पिछड़ा वर्ग विभाग में तैनात तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्योरा निदेशालय ने मांगा है।
निदेशालय स्तर से जारी पत्र में छात्रवृत्ति वितरण में घपले में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
वर्ष 2002-2003 से लेकर 2005-06 के दौरान पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजनांतर्गत फर्जी छात्र संख्या के आधार पर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति वितरण में धांधली की शिकायतें सामने आईं थी। शासन द्वारा मामले में विभागीय जांच के बाद आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा मेरठ से जांच कराई जा रही है।
निदेशक पिछड़ा वर्ग विभाग ने 19 नवंबर 2020 को जिले के पिछड़ा वर्ग को पत्र जारी कर घोटाले के समय जिले में तैनात अफसरों और कर्मचारियों का ब्योरा मांगा है।
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शासन द्वारा करोड़ों के फर्जी छात्रवृत्ति वितरण कार्य में तत्कालीन जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी चंदन सिंह, श्याम नरायण कुशवाहा, टीकाराम रावत, पिछड़ा वर्ग का अतिरिक्त प्रभार देख रहे तत्कालीन परियोजना निदेशक विजय कुमार, पुष्पा सक्सेना के अतिरिक्त विभाग में तैनात पटल सहायक शेर सिंह, दिनेश कुमार, सहायक पिछड़ा वर्ग अधिकारी सुरेश चंद्र आदि का ब्योरा शासन को भेजा गया है।
अनुपम रॉय, जिला पिछड़ा वर्ग अधिकारी
पूरे प्रकरण की जांच वर्ष 2009 से की जा रही है। पूर्व में जांच का जिम्मा आर्थिक अपराध शाखा कानपुर के पास था। बाद में लखनऊ शाखा ने जांच की। शासन के निर्देश के बाद पूरे प्रकरण की जांच ईडब्ल्यूएस मेरठ शाखा द्वारा की जा रही है। जांच अंतिम चरण में है।
ऊदल सिंह, प्रभारी जांच दल एवं निरीक्षक आर्थिक अपराध शाखा मेरठ