फीरोजाबाद। संथारा प्रथा के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय के विरोध में जैन समाज सोमवार को लामबंद हुआ। सुहागनगरी में जैन समुदाय के लोगों ने विरोध स्वरूप बाजार बंद रखा। लोग काली पट्टी बांधकर जगह-जगह पर जुलूस निकालकर विरोध जताया गया। अंत में प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
सुहागनगरी में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा संथारा प्रथा पर लगाई गई रोक के विरोध में समस्त व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद रखे। इसी क्रम में जितेंद्र जैन ‘मुन्ना’ के नेतृत्व में जैन समुदाय के सैकड़ों पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे ने काली पट्टी बांधकर मौन जुलूस निकाला। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा गया। इसी क्रम में जैन मुनियों के नेतृत्व में शहर के छदामी लाल जैन मंदिर से चंद्रप्रभु मंदिर तक मौन जुलूस निकाला गया। संथारा को आत्महत्या करार दिए जाने पर जैन समाज ने चंद्रप्रभु मंदिर सदर बाजार में जनसभा की। जैन मुनि श्री अमित जी सागर महाराज ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने संथारा को आत्महत्या की श्रेणी में रखकर भयंकर अपराध किया है। आत्महत्या तनाव और कुंठा की स्थिति में की जाती है, जबकि संथारा प्रथा आस्था का विषय है। यह आवेश में किया कृत्य नहीं, अपितु सोच-समझकर लिया गया व्रत है। जैन विद्वान अनूप चंद्र जैन ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट को किसी परंपरा के विरुद्ध आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। इस दौरान वीरेंद्र जैन, सुशील जैन, अरुण जैन पीली कोठी, आदीश जैन, डा. महेंद्र जैन, जय कुमार जैन, सुनील जैन, सतेंद्र जैन साहू, डा. धीरेंद्र जैन, शैलेंद्र जैन शैली, सतीश सलावालिया, राजीव जैन रागी, अपूर्व जैन, सतेंद्र जैन, रतन जैन प्रवीन कटारा, पुष्पेंद्र मामा, महेंद्र जैन, शीतल जैन, पुष्पा जैन, चंद्र प्रभा जैन, दवेंद्र जैन आदि मौजूद रहे।
ये समितियां रहीं शामिल
आंदोलन के दौरान धर्म बचाओ आंदोलन समिति के तत्वावधान में श्री मुनि अमित सागर वर्षायोग समिति एवं सकल जैन समाज, श्री पार्श्वनाथ अग्रवाल जैन मंदिर, दिगंबर जैन चौबीसी टोंक मंदिर, वर्धमान महिला मंडल, महिला जैन मिलन, चंद्रवाड़ मेला समिति, निर्भय सागर पाठशाला, विमल युवा जागृति मंच, तरुण क्रांति मंच, पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पद्मावती सेवा समिति, धर्म जागृति संगठन समेत अन्य संगठन मौजूद रहे।
क्या है ये संथारा
जैन समाज में यह हजारों साल पुरानी प्रथा है। इसमें जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी मृत्यु निकट है तो वह खुद को कमरे में बंद कर खाना-पीना त्याग देता है। मौन व्रत रखता है। इसके बाद वह किसी भी दिन देह त्याग देता है।
कितना व्यापक है
वैसे इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है लेकिन जैन संगठनों के मुताबिक हर साल 200 से 300 लोग संथारा के तहत देह त्यागते हैं। अकेले राजस्थान में ही यह आंकड़ा 100 से ज्यादा है। फीरोजाबाद के पीडी जैन मंदिर में विगत माह भी जैन मुनि आश्चर्य सागर महाराज ने देह त्याग किया था।
क्या है फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने नौ वर्ष की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। जैन धर्म की सैकड़ों सालों से प्रचलित संथारा/संलेखना प्रथा को आत्महत्या के बराबर अपराध बताया। कोर्ट ने राज्य सरकार को संथारा पर रोक लगाने का आदेश देते हुए कहा है कि संथारा लेने और संथारा दिलाने वाले, दोनों के खिलाफ आपराधिक केस चलना चाहिए। संथारा लेने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 309 यानि आत्महत्या का अपराध का मुकदमा चलना चाहिए। संथारा के लिए उकसाने पर धारा 306 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। निखिल सोनी ने 2006 में याचिका दायर की थी। उनकी दलील थी कि संथारा इच्छा-मृत्यु की ही तरह है, इसे धार्मिक आस्था कहना गलत है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुनील अंबवानी और जस्टिस वीएस सिराधना की बेंच ने अप्रैल में सुनवाई पूरी कर ली थी। हालांकि फैसला अभी हाल ही में आया है।
कोर्ट ने गलत क्यों माना
कोर्ट ने जिस याचिका पर ये फैसला दिया, उसमें कहा गया था कि संथारा सती प्रथा की ही तरह है। जब सती प्रथा आत्महत्या की श्रेणी में आती है तो संथारा को भी आत्महत्या ही माना जाए। अदालत ने इस तर्क को माना है। कोर्ट ने कहा कि जैन समाज यह भी साबित नहीं कर सका कि यह प्रथा प्राचीनकाल से चली आ रही है।
शिकोहाबाद में भी निकाला मौन जुलूस
शिकोहाबाद (ब्यूरो)। जैन समाज के लोग सोमवार को प्रतिष्ठान बंद कर प्रात: 10 बजे पंचायती मंदिर के प्रांगण में एकत्रित हुए। यहां से जुलूस के रूप में बड़ा बाजार, कटरा बाजार, पक्का तालाब, तहसील तिराहा होता हुआ तहसील प्रांगण पहुंचा। मौन जुलूस में पुरुष और महिलाएं हाथों में संलेखना को प्रतिबंधित करने के विरोध में नारे लिखीं पट्टिकाएं लेकर चल रहे थे। तहसील पहुंचकर जैन समाज के लोगों ने हस्ताक्षरित राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।