फिरोजाबाद। एआरटीओ कार्यालय की गलती का खामियाजा पीड़ित को ही भुगतना पड़ता है। लाइसेंस बनवाने में गलती विभाग ने कर दी लेकिन संबंधित को गजट कराने के बाद लाइसेंस ठीक किए जाने की बात कही जा रही है। यही नहीं, लोगों के अनुसार पैसा नहीं मिलने पर संबंधित लाइसेंस भी अग्रसारित नहीं किया जाता है। स्टाफ के द्वारा इस तरह का खेल भी किया जा रहा है।
एआरटीओ कार्यालय में लर्निंग लाइसेंस, परमानेंट लाइसेंस व चारपहिया गाड़ियों के लाइसेंस बनवाने वालों की मुसीबत कम नहीं है। अधिकांश मामले तो अधिकारियों के संज्ञान में ही नहीं आते हैं, क्योंकि लिपिकों की मनमानी हावी रहती है। पीड़ित शिकायत लेकर इसलिए नहीं जाता क्योकि दोबारा भी काम इन्हीं से पड़ेगा। शिकोहाबाद के निवासी नीरज यादव के आधारकार्ड से लेकर गाड़ी के कागजों तक में नीरज यादव लिखा है।
लेकिन लाइसेंस में नीरज ही लिख दिया है। इसे ठीक कराने को नीरज यादव विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उससे समाचार पत्र में गजट कराने के बाद ही ठीक किए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, सुनील कुमार ने अपने लाइसेंस को परमानेंट कराने को विभाग मेें छह माह पूर्व आवेदन किया। सुनील का आरोप है कि पैसे नहीं देने के कारण लाइसेंस को अग्रसारित ही नहीं किया।
कई बार विभाग के चक्कर लगाए लेकिन अभी तक विभाग के द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया है। नई बस्ती निवासी रंजीत सिंह लाइसेंस के लिए आवेदन किया था परंतु किसी की सिफारिश के कारण परीक्षा में पास तो कर दिया। लेकिन लाइसेंस अभी तक नहीं मिला है। विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर है।
परमानेंट व लर्निंग लाइसेंस समय से नहीं बनने की मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। हो सकता है यह मामले मेरे इस जिले में आने से पूर्व के हों। यदि कोई शिकायत आती है तो उसका समाधान कराएंगे। विभाग ने पहले की व्यवस्था में काफी सुधार किया है।
प्रदीप कुमार सिंह - एआरटीओ फिरोजाबाद।