मरीज बनकर आए बदमाशों ने जिला अस्पताल के चिकित्सक कंपाउंड में निवास करने वाली पूर्व महिला चिकित्सा अधीक्षक के घर दिन दहाड़े धावा बोल दिया। महिला चिकित्सक के हाथ पैर बांध कर बदमाश सोने-चांदी के आभूषणों के साथ नकदी लूट कर ले गए। चिकित्सक के आवास पर हुई लूट से सनसनी फैल गई। एसपी के साथ कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।
जिला अस्पताल कैंपस में बने सरकारी क्वाटर में डा. नंद कुमार शर्मा अपनी पत्नी डा. सुनीता शर्मा (पूर्व महिला चिकित्सा अधीक्षक) के साथ निवास करते हैं। वर्तमान में डा. सुनीता शर्मा महिला अस्पताल में संविदा पर कार्यरत हैं। जबकि डा. नंदकुमार शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे डा. सुनीता शर्मा क्वाटर पर अकेली थीं, पति किसी कार्य से बाहर गए थे। सुबह पौने ग्यारह बजे एक महिला और युवक मरीज बनकर उनके आवास पर पहुंचे। डा. सुनीता शर्मा ने जैसे ही दरवाजा खोला तो वह अंदर प्रवेश कर गए। बाद में दो और युवक आ धमके। सुनीता कुछ समझतीं, तब तक एक बदमाश ने उनके चेहरे पर शॉल डाल दी। महिला चिकित्सक ने शोरगुल करने का प्रयास किया तो बदमाशों ने जान से मारने की धमकी देते हुए उनके हाथ-पैर बांध दिए। लुटेरे सोने, चांदी के आभूषणों के साथ नकदी लूट कर ले गए। बदमाशों के जाने के बाद महिला चिकित्सक ने समीप में निवास करने वाले डा. मनोज को सूचना दी। कुछ ही देर में सीएमएस डा. अजय शुक्ला अन्य चिकित्सकों के साथ मौके पर पहुंच गए। सूचना पर एसपी पीयूष श्रीवास्तव, एएसपी राकेश पांडेय, सीओ सिटी राजेश चौधरी के साथ कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। डाग स्क्वायड और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम ने घटना स्थल से सुबूत जुटाए। महिला चिकित्सक से बदमाशों ने कोई परेशानी नहीं होने की बात भी पूछी थी।
एसपी ने की पूछताछ
एसपी पीयूष श्रीवास्तव ने महिला चिकित्सक से काफी देर तक पूछताछ की। पुलिस के हाथ कई अहम सुराग भी लगे हैं। एसपी का कहना है कि जल्द घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।
चिकित्सक कंपाउंड में पहले भी हुई हैं घटनाएं
सुरक्षा के नाम पर अस्पताल में मात्र एक चौकीदार
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। रविवार सुबह जिला अस्पताल के कैंपस में पूर्व महिला सीएमएस के यहां हुई घटना पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का परिणाम रही। इससे पूर्व में हुई लूट और चोरी की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जाते तो शायद रविवार को यह घटना नहीं होती।
नेशनल हाईवे किनारे विशाल भूखंड पर बने जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के आवासों की सुरक्षा को बनी बाउंड्रीवाल टूटी हुई है। आम लोगों ने अस्पताल कैंपस को सार्वजनिक रास्ता बना रखा है। जिला अस्पताल में चौकीदारों के पदों की संख्या छह है लेकिन वर्तमान में एक ही चौकीदार के कंधों पर सुरक्षा का जिम्मा है। डा. मनोज के बेटे के साथ हुई लूट की घटना के बाद पुलिस चौकी की स्थापना तो कर दी गई। पांच सिपाहियों के साथ एक उपनिरीक्षक की तैनाती हुई। इसमें से तीन सिपाही एचसीपी बन गए। दो सिपाही दिन और रात को ड्यूटी करते हैं। एक एचसीपी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
कई बार लिखे पत्र नहीं हो सकी कार्रवाई
पूर्व महिला सीएमएस के यहां दिनदहाड़े हुई लूट की घटना की सीएमएस डा. अजय शुक्ला और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने निंदा करते हुए कहा है कि बाउंड्री निर्माण और चौकीदारों की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखे गए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी। सीएमएस ने कहा कम से कम दस होमगार्ड अस्पताल में तैनात होने चाहिए।