करेंसी की किल्लत से किसान को भी परेशानी में डाल दिया है। वह अपने धान को बेच नहीं पा रहा है। सरकारी खरीद केन्द्रों पर धान का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से होगा। खुले बाजार में आढ़तिया धान का भुगतान 500 एवं हजार के नोट में कर रहे हैं। किसान को नकदी की जरूरत है। रोजाना का काम आखिर कैसे चलाएं।
जसराना में सरकारी धान खरीद केंद्र की हालत खराब है। नगला पीपल में लगे धान खरीद केंद्र पर केवल एक बैनर टंगा है। यहां न कांटा है और न वारदाना। किसानों को ही नहीं पता कि धान खरीद केंद्र कहां है। नगला मिलिक निवासी विजयपाल सिंह ने कहा कि खेतों में गेहूं की बुवाई करने के लिए मजबूरी में धान आढ़तियों को बेचना पड़ा। सरकारी क्रय केंद्रों की जानकारी ही नहीं है। सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित कर दिया, लेकिन क्रय केंद्र कहां पर स्थापित हैं किसी को पता ही नहीं है। गांव भैंडी निवासी संतोष ने कहा कि आढ़ती एवं अधिकारी मिलकर घोटाला कर रहे हैं। धान खरीदे बिना ही लक्ष्य पूरा कर दिया जाता है। डिप्टी आरएमओ राघवेंद्र सिंह यादव ने बताया धान खरीद केंद्र शिकोहाबाद, सिरसागंज, जसराना, मुस्तफाबाद एवं नगला जाट में स्थापित हैं। कामन धान आने की शुरूआत ही नहीं हुई। जिले में तो धान का क्षेत्रफल काफी कम होने के कारण जिले को पहले कोई लक्ष्य ही नहीं मिला था। अब 1600 मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य दिया है। वहीं 1470 रुपया प्रति क्विंटल की ही दर से खरीदा जा सकेगा।