फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राममंदिर के लिए पुलिस की खाई लाठी, जेल गए अब सपना हुआ साकार

विज्ञापन
विज्ञापन
फिरोजाबाद। राममंदिर निर्माण के लिए सन 1992 में हुए आंदोलन के दौरान कारसेवा करने वाले लोग पांच अगस्त को मंदिर की आधारशिला रखे जाने से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने पुलिस की लाठियां खाईं और जेल भी गए। वर्षों बाद अब वह क्षण आया है जब अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा। लेबर कालोनी निवासी बुजुर्ग रघुवीर प्रसाद उपाध्याय कहते हैं कि भगवान श्रीराम के मंदिर के लिए आंदोलन का बिगुल बजा तो हम सक्रिय हो गए। अयोध्या जाने से पहले ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। फिरोजाबाद में जेल नहीं थी, हमें अलीगढ़ जेल भेजा गया। हम संकल्पित थे कि भव्य मंदिर तो एक न एक दिन बनेगा। आखिर वह दिन आ ही गया।
विज्ञापन

भाजपा कार्यकर्ता श्रीनिवास शर्मा कहते हैं कि पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। सीधे अलीगढ़ भेज दिया। दीपावली का त्योहार तक अलीगढ़ जेल में मना और बाबरी मस्जिद ढह जाने के बाद ही हमें छोड़ा गया। क्योंकि पुलिस को शक था कि यह जत्था रुकेगा नहीं अयोध्या जरूर जाएगा। हमें बेहद खुशी है कि जिसके लिए हम जेल गए वह मंदिर अब बनने जा रहा है। सरगवां निवासी डॉ. सुधाकांत कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि कारसेवक के रूप में हम लोग पांच दिसंबर 1992 को अयोध्या पहुंच गए थे। छह दिसंबर को आंदोलन शुरू हो गया था। हमारे साथ बहुत से कारसेवक जिले से गए थे। भगवान राम का भव्य मंदिर बनें यही हमारा सपना था। निश्चित ही पांच अगस्त को प्रत्येक कारसेवक को बेहद खुशी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें