आलू की अच्छी फसल को देखकर आलू किसान काफी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद इस बार उनके नुकसान की भरपायी हो जाएगी। वहीं कुछ किसान पिछले वर्ष आलू की हुई दशा को सोचने भर मात्र से सिहर उठे हैं।
विगत वर्ष आलू की फसल से बर्बाद हुए आलू किसानों ने इस बार पुन: इस उम्मीद के साथ आलू की फसल लगायी। इस बार किसानों की फसल भी काफी अच्छी हुई है। नगला बलिया के आलू किसान सुखवीर सिंह पौनियां बताते हैं कि क्षेत्र में कई नये कोल्ड स्टोरेज खुलने से किसान निश्चिंत हैं। उन्हें भरोसा है कि उनका आलू बाहर खेतों में पड़ा रहकर नहीं सड़ेगा।
वहीं किसान अमरसिंह सोलंकी, रनवीर यादव का कहना था कि सरकार को आलू के निर्यात के विषय में अवश्य विचार करना चाहिए। अच्छी तादात में फसल होने से किसान को एक चिंता यह भी है कि कहीं पुन: पिछली फसल की तरह उनका हाल न हो जाये। इसलिए आलू किसानों को आत्महत्या से बचाने के लिए शासन को आलू निर्यात कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।
आलू के बड़े किसान देवेन्द्र तोमर, जगन सेठ का कहना है कि चुनाव चल रहा है। सरकार जो भी बने अपने वादे पर कायम रहे तो बंपर आलू की पैदावार से उत्पन्न आलू किसानों की खुशियां बरकरार हो रह सकतीं हैं।
आत्महत्या को होंगे मजबूर
टूंडला (ब्यूरो)। आलू के छोटे किसान चंपाराम, सालिगराम, चंदनसिंह, सुखिया आदि का कहना था कि यदि इस बार भी आलू की दशा पहले जैसी हुई तो वे बर्बाद हो जाएंगे। बैंक से लिए कर्जे से उनकी फसल होना संभव नहीं था। उन्होंने कुछ साहूकारों से भी कर्जा लेकर आलू की फसल की है। फसल बर्बादी पर उनके सामने परेशानी आ सकती है। किसान आत्महत्या जैसे कदम भी उठा सकते हैं।
फोटो-टूंडला में एक किसान द्वारा खोदा गया आलू