हजरत शाह सूफी हमीदउद्दीन चिश्ती की दरगाह पर उर्स आयोजित, पुलिस प्रशासन की टीमें रहीं मुस्तैद
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। यमुना किनारे स्थित हजरत शाह सूफी हमीदउद्दीन चिश्ती रहमत उल्ला अलैह के 807 वें उर्स के अंतिम दिन अदीकतमंदों की भीड़ उमड पड़ी। जिले के साथ-साथ आस-पास के जिलों से दरगाह शरीफ पर हाजिरी लगाने वालों का क्रम चलता रहा। पुलिस-प्रशासन ने भीड़ को ध्यान में रखते हुए दरगाह की ओर जाने वाले रास्तों को बड़े वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया था। कुलशरीफ की रस्म सूफी संतों ने अदा की। इसके बाद लंगर का वितरण का क्रम चला। रात में कव्वाली शमां पर अकीदतमंद झूमते रहे।
दरगाह पर आयोजित उर्स के दूसरे दिन महफिले शमां हुई। इसमें कव्वालों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। मेला कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद अब्बास हसन नकवी, उपाध्यक्ष एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह एवं थाना बसई मोहम्मदपुर के प्रभारी ने महफिले शमां का शुभारंभ किया। सोमवार सुबह सूफी संतों ने कुलशरीफ की रस्म अदा कराई। इसमें सूफी गुलाम हसनैन मियां, सूफी रईस मियां, सूफी गुलाम समदानी मियां, गुड्डू मियां, सूफी हाजी हनीफ मियां, सूफी इकबाल मियां, सूफी गुलाम अब्बास मियां के साथ जिला मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष मोहसिन मियां मौजूद थे। सरकारी चादरपोशी एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह, तहसीलदार सदर रवीश कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं आयोजन कमेटी के पदाधिकारियों ने की। इसके साथ ही लंगर का वितरण प्रारंभ हुआ। दरगाह शरीफ पर हाजिरी लगाने वालों का क्रम शाम तक चलता रहा।
चादर चढ़ाकर की मनौती
सूफी शाह की दरगाह पर चादर चढ़ाकर मनौती का क्रम पूरे दिन चलता रहा। दूर दराज क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों ने चादरपोशी की। दरगाह शरीफ पर फिरोजाबाद जिले के अलावा इटावा, मैनपुरी, औरैया के एटा, आगरा, अलीगढ़ सहित आस-पास के जिलों से काफी अकीदतमंद पहुंचे थे।
यमुना के जलस्तर को ध्यान में रखते हुए तैनात किया था फोर्स
यमुना नदी में पानी का तेज बहाव होने के कारण उर्स के अंतिम दिन आई हजारों की भीड़ में से कहीं युवा यमुना की ओर नहीं जाएं इस लिहाज से पुलिस फोर्स को तैनात किया था। दरगाह से यमुना की ओर जाने वाले रास्ते,ईधौन पुल के साथ आस-पास क्षेत्र में पुलिस फोर्स की मुस्तैदी थी। इतना ही नहीं यमुना की ओर आने वालों को रोका जा रहा था।
सामाजिक संगठन रहे सक्रिय
उर्स के दौरान किसी ने निशुल्क दवा का कैंप लगाया तो किसी ने शीतल जल की प्याऊ लगाकर अकीदतमंदों की सेवा की। कई संगठनों ने खोया पाया शिविर लगाए। इधर उर्स के मेले में सजी दुकानों पर लोग खरीददारी करते दिखाई दिए।