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कोरोना काल में अभिभावकों पर आर्थिक संकट, आरटीई में डेढ़ गुना अधिक हुए दाखिले ी

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फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण के बाद शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश लेने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आरटीई के तहत प्रवेश लेने वालों की संख्या करीब डेढ़ गुनी बढ़ गई।
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दुर्लभ समूह और गरीब परिवार के बच्चों को आरटीई के तहत अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। पहले चरण में 1781 आवेदन आए थे। इसमें 1444 बच्चों का चयन हो गया है। लॉटरी के माध्यम से उन्हें स्कूल आवंटित किए गए हैं। वर्ष 2020 में पहले चरण में एक हजार बच्चों के ही एडमिशन हुए थे। सरकार इन छात्रों की कक्षा आठवीं तक फीस स्कूलों को उपलब्ध कराएगी।
दूसरे चरण के एडमिशन की प्रक्रिया शुरू
दूसरा चरण में प्रवेश लेने के लिए इच्छुक व्यक्ति आरटीई के तहत दो अप्रैल से 23 अप्रैल तक ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं। उसके बाद की प्रक्रिया पूर्ण कर प्रवेश कराए जाएंगे। पहले चरण में अभिभावकों के ऑनलाइन आवेदन पत्रों की जांच के उपरांत लॉटरी सिस्टम के माध्यम से उन्हें स्कूल आवंटन कर दिए गए हैं।
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बच्चों से किया भेदभाव तो जाएगी मान्यता
आरटीई के तहत पिछले दो सालों से शासन से शुल्क प्रतिपूर्ति का बजट पर्याप्त मात्रा में नहीं आ पा रहा है। ऐसे में कई निजी स्कूल सरकार से स्कूल फीस न आने के कारण उन बच्चों को पीछे बैठा देते हैं या अन्य भेदभाव करते हैं। बीएसए आफिस में इस मामले को लेकर पिछले वर्ष आठ शिकायतें पहुंची थीं। जिला समन्वयक अभय कुमार ने बताया कि शासन ने आदेश जारी कर दिया है। यदि कोई विद्यालय किसी छात्र का दाखिला लेने से इंकार करता है या फिर उस छात्र के साथ भेदभाव करता है तो उस स्कूल की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना काल के बाद छात्रों की संख्या में इजाफा होने के साथ आरटीई के तहत इस बार प्रवेश लेने में अभिभावक भी उत्सुकता दिखा रहे हैं। एक हजार चार सौ से अधिक बच्चों का लॉटरी के माध्यम से स्कूलों का आवंटन हो गया है। दूसरे व तीसरे चरण मिलाकर इस बार सर्वाधिक प्रवेश की उम्मीद है।
- अंजली अग्रवाल, बीएसए।
यह है आरटीई
आरटीई के तहत राज्य के स्कूलों में बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त एडमिशन दिया जाता है। इसके अंतर्गत राज्य के गरीब नागरिकों के बच्चों को निशुल्क एडमिशन की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान की जाती है, जिसमें बच्चे की शिक्षा का सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। देश में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 लाया गया था। यह छह से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त शिक्षा की गारंटी देता है। संसद ने चार अगस्त 2009 को इस एक्ट को अधिनियमित किया और यह एक अप्रैल, 2010 को लागू हुआ।
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पहले चरण में आरटीई के तहत हुए एडमिशन
वर्ष कुल प्रवेश
2022- 1444
2021- 1006
2020- 938
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