फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उद्योग विभाग के लिए सरदर्द बनीं पुरानी इकाइयां

Fri, 23 Dec 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
विज्ञापन
फैक्ट्री - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पर्यावरण मंत्रालय तक मामला पहुंचने के बाद लंबित इकाइयों के साथ-साथ पुरानी इकाइयां भी उद्योग विभाग के लिए बड़ा सरदर्द बन गई हैं। विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों को फाइनल सूची तैयार करने में पसीने छूट रहे हैं।
विज्ञापन

सुहागनगरी में 1996 से पूर्व 600 से अधिक कांच इकाइयां संचालित थीं। इसमें कई इकाइयां तो मात्र कागजों पर संचालित हो रही थीं तो कई कोयला पाने के लिए। विभाग के पास वर्षों पुरानी 433 इकाइयों की सूची है। हाईकोर्ट द्वारा कोयले के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद सैकड़ों इकाइयों का अस्तित्व समाप्त हो गया। वर्तमान में 203 कांच इकाइयां गैस से संचालित हैं। विभाग द्वारा इकाइयों का रिकार्ड रखने में लापरवाही बरती गई। बंद और दूसरे स्थान पर शिफ्ट इकाइयां भी पुरानी सूची में शामिल हैं। कर्मियों ने रिकार्ड दुरुस्त नहीं किया तो अफसरों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
टीटीजेड में लंबित 43 इकाइयों की पैरवी करते-करते अफसर व कर्मचारी भी फंस गए। पर्यावरण मंत्रालय ने कमेटी भेजकर प्रदूषण व क्षमता वृद्धि की हकीकत देखी। उसके बाद विभाग से पुरानी 433 इकाइयों, वर्तमान में संचालित 203 इकाइयों का पूरा रिकार्ड तलब किया है, इनके द्वारा कितने कोयले की खपत की जाती थी, भट्टी का साइज कितना था, कितना प्रोडक्शन किया जाता था। गैस मिलने के बाद कितनी इकाइयों द्वारा क्षमता वृद्धि की गई है। इसके साथ ही लंबित चल रहीं 43 इकाइयों का प्रजेंट स्टे्टस भी तलब किया गया है।
विज्ञापन

मंत्रालय द्वारा पुराना रिकार्ड मांगा गया है। 14 दिसंबर से लगातार रिकार्ड को दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है, परंतु अभी तक फाइनल सूची तैयार नहीं हो सकी है।

फाइनल सूची बनाने को कल तक की मोहलत
उपायुक्त उद्योग वीरेंद्र कुमार ने सहायक प्रबंधक सहित अधीनस्थों को पुरानी और वर्तमान इकाइयों की फाइनल सूची उपलब्ध कराने के लिए 25 दिसंबर तक की मोहलत दी है। इस दौरान सभी के अवकाश भी रद्द कर दिए गए हैं। इसके लिए असिस्टेंट कमिशभनर अमरीश कुमार पांडे को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें