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दिनभर होती रहीं तैयारियां, चैत्र नवरात्र आज से, सुबह 6.10 से है घट स्थापना का मुहूर्त

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दिनभर होती रहीं तैयारियां, चैत्र नवरात्र आज से, सुबह 6.10 से है घट स्थापना का मुहूर्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहा है। शुक्रवार को दिनभर मंदिरों व घरों में तैयारियां होती रहीं। मंदिरों की साज-सज्जा का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। वहीं महिलाएं बाजार में पूजन सामग्री की खरीदारी करती दिखीं। पंडित गोविंद शास्त्री ने बताया कि शनिवार से चैत्र नवरात्र प्रारंभ हो रहा है। ऐसे में घट स्थापना सुबह 6:10 से 11:28 बजे तक की जा सकती है। यह अति शुभ घड़ी में है। दोपहर 12 बजे से 12:50 बजे तक भी साधक घट की स्थापना कर सकते हैं। इस बार माता का आगमन घोड़े पर और प्रस्थान भैंसे पर हो रहा है। शास्त्रों में इन दोनों वाहनों को बहुत अच्छा नहीं माना गया है। जो साधक विधि विधान पूजन करेंगे, उनकी शनि रक्षा करेंगे।
चैत्र नवरात्र के लिए मंदिरों व घरों में सफाई व साज-सज्जा का क्रम दिनभर चलता रहा। वहीं बाजार पूजन सामग्री से सजकर तैयार है। बड़ी संख्या में महिलाएं और अन्य लोग पूजन सामग्री खरीदारी करते भी दिखे। शहर के राजराजेश्वरी कैलादेवी मंदिर और उसायनी स्थित वैष्णोदेवी धाम, चामुंडा देवी मंदिर, जसराना स्थित मां कामाख्या देवी मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में नवरात्र में विशेष पूजा की जाती है। राजराजेश्वरी कैलादेवी मंदिर के महंत शिवसुंदर कलोनी ने बताया कि इस वर्ष चैत्र नवरात्र दो अप्रैल शनिवार से आरंभ हो रहे हैं। जिसका समापन 11 अप्रैल सोमवार के दिन होगा।
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सिद्ध पीठ बालाजी मंदिर परिसर में सर्वमंगला देवी दुर्गा माता के मंदिर पर शनिवार से 10 अप्रैल तक सुबह 9 बजे से हवन पूजन और भजन के कार्यक्रम होंगे। 10 अप्रैल को राम नवमी के अवसर पर राम जन्मोत्सव कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न होगा। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष राजेश गुप्ता और महंत मनीष भारद्वाज ने भक्तों से पूजा अर्चना के समय पॉलीथिन में प्रसाद न लाने का आग्रह किया है।
ऐसे करें कलश स्थापना
- सबसे पहले प्रतिपदा तिथि पर जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा की वेदी को साफ-सुथरा करें। पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करने से पहले उसे गंगा जल से शुद्ध करें, फिर पूजा में सभी देवी -देवताओं को आमंत्रित करें। घटस्थापना करने से पहले भगवान गणेश की आराधना करें। पूजा स्थल पर कलश को रखते हुए पूजा आरंभ करें। कलश को पांच तरह के पत्तों से सजाएं फिर हल्दी की गांठ, सुपारी, दूर्वा आदि रखें। कलश को स्थापित करने के लिए उसके नीचे मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं। कलश के ऊपरी वाली हिस्से में पवित्र धागा बांध दें। कलश के मुख पर एक नारियल रखें। मंत्रों का जाप करें और कलश को फूल,फल और धूप अर्पित करें।
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करौली से आई थी कैलादेवी मंदिर की अखंड ज्योति
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। शहर के मध्य स्थित कैला देवी मंदिर राजस्थान के करौली मंदिर का प्रतिबिंब है। गर्भगृह में जलने वाली अखंड ज्योति भी करौली से आई है। यहां होने वाली पूजा की सभी विधि भी राजस्थान के करौली मंदिर जैसी हैं। मंदिर के महंत शिवसुंदर कलोनी ने बताया कि कोटला रोड रामलीला मैदान स्थित राजराजेश्वरी मां कैला देवी मंदिर की स्थापना 30 वर्ष पहले हुई थी। मंदिर की बगल में प्राचीन बड़ा हनुमान मंदिर है। शहर के कुछ उद्यमियों को कैला देवी मंदिर स्थापित करने की प्रेरणा मिली, जो 23 मार्च 1991 को मंदिर की स्थापना के साथ पूरी हुई। मां कैला देवी के साथ चामुंडा देवी की प्रतिमा स्थापित है। ठीक सामने लांगुरा वीर का मंदिर है। यहां नवरात्र में नेजा चढ़ाने वालों की कतार लगी रहती है। जिन लोगों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वे परिवार और रिश्तेदारों समेत बैंडबाजों के साथ यहां नेजा चढ़ाते हैं।
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मां हर किसी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। जो भी भक्त यहां सच्चे मन से आता है, उसकी मुराद अवश्य पूरी होती है। नवरात्र में बड़ी संख्या में चढ़ने वाले नेजा और माता की पोशाकें इस बात के प्रमाण हैं। मंदिर में काफी दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
शिवसुंदर कलौनी, महंत
राजराजेश्वरी केलादेवी मंदिर
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करौली मंदिर का समय
मंगला दर्शन- सुबह 4 से 5 बजे तक।
दर्शन- सुबह 6 से 7 बजे तक।
पूजा व शृंगार -सुबह 7 से 8 बजे तक।
दर्शन- सुबह 9 से दोपहर एक
पट बंद- दोपहर 01 से 3 बजे तक।
दर्शन- दोपहर 3.10 से रात्रि 10 बजे तक।
संध्या आरती- शाम सात बजे
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