सांसद रामगोपाल यादव इन दिनों सपा से बाहर हैं। सपा की रार के बीच सपा के प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल यादव भाजपा नेताओं से नजदीकी का खुला आरोप रामगोपाल यादव पर लगा चुके हैं। ऐसे में नड्डा के कार्यक्रम में रामगोपाल यादव की अपनी पूरी टीम के साथ मौजूदगी तो सुर्खियों में रही है, साथ ही जिस तरह से प्रो. रामगोपाल यादव ने नड्डा के साथ नजदीकी दिखाते हुए उनकी तारीफ के पुल बांधे उससे अटकलों का बाजार फिर गर्म हो गया। नड्डा भी रामगोपाल की तारीफ में कसीदें गढ़ते नजर आए।
रामगोपाल यादव अपनी टीम के साथ पहले ही मंच पर आ गए थे। जैसे ही स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा आए सांसद रामगोपाल यादव अपने स्थान से उठकर उन्हें मंच की सीढियों तक रिसीव करने पहुंचे। नड्डा और रामगोपाल गर्मजोशी के साथ गले मिले। पास-पास बैठे तो आपस में हंस-हंस कर बतियाते रहे।
भाजपा और सपा के कार्यकर्ता जरूर एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, लेकिन मंच से बोलते हुए सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि जेपी नड्डा ऐसे मंत्री हैं, जो सत्ता और विपक्ष दोनों में लोकप्रिय हैं। हम लोग दिल्ली में जब भी मिलते हैं राजनीति नहीं होती। रामगोपाल ने कहा कि नड्डा ने उन्हें स्वास्थ्य समिति के साथ-साथ एम्स की गर्वनिंग बाडी में भी रखा है। इसलिए भी हम दोनों का काफी मेलजोल रहता है। नड्डा की तारीफ में रामगोपाल यादव ने कहा कि मेडिकल कालेज की नींव एक अच्छे इंसान ने रखी है, तो स्वास्थ्य सेवाएं भी शानदार मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि आज तो हम यहां मिले हैं और वह उनके पुत्र (सांसद अक्षय यादव) के निर्वाचन क्षेत्र में आए हैं इसलिए कृतज्ञ हैं, कल हम दोनों फिर लोकसभा के सत्र में मिलेंगे। इस बीच रामगोपाल ने यह चुटकी भी ली कि शहर में बहुत काम हो रहे हैं, काम राज्य सरकार करा रही है और श्रेय असीजा को मिल रहा है। लेकिन कोई बात नहीं विकास होना चाहिए।
जब बारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की आयी, तो उन्होंने भी रामगोपाल यादव द्वारा की गई तारीफ का कर्ज सूद सहित उतारने में देरी नहीं की। नड्डा ने कहा कि रामगोपाल वरिष्ठ नेता हैं जब भी उन्हें जरूरत महसूस होती हैै वह उनकी राय भी लेेते हैं। लोकसभा में भी वह उनकी मदद लेते हैं। सबका विकास, सबका साथ ही भाजपा का धैय है।
करेंसी सेे उपजी परेशानी पर कुछ नहीं बोले नड्डा
फीरोजाबाद। मेडिकल कालेज के शिलान्यास के बाद प्रेस से बातचीत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं तो गिनाई, लेकिन करेंसी संकट से निजी अस्पतालों में मरीजों को मौत और इलाज न मिलने के सवाल को टाल गए और कोई जवाब नहीं दिया।