प्राथ्ामिक विद्यालय घ्ाातरी में चटाइऱ्ई पर बैठे बच्चे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराे फीराेजाबाद
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों पर जिले में भले ही करोड़ों खर्च हो रहे हाें, लेकिन परिषदीय स्कूलों की हालत अच्छी नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए मेज कुर्सियां तक नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की है। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को जिले के परिषदीय स्कूलों का हाल देखा। सुबह की सर्दी में भी बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ रहे थे। टाट-पट्टी भी फटी थीं। सर्दी से बचने को गेहूं, आटा, चावल की बोरियां को फर्श पर बिछाकर बैठ जाना बच्चों की दिनचर्या में शामिल है।
प्राइमरी विद्यालय दतौजी खुर्द : यहां बच्चों को बैठने के लिए फटे-पुराने बोरे दिए गए हैं। तीन शिक्षक तैनात हैं, लेकिन 10.45 तक कोई शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं था। विद्यार्थी झाडू लगा रहे थे, फटे-पुराने टाट-बोरे बिछा रहे थे।
प्राइमरी स्कूल नई बस्ती कन्या : यहां बच्चों की पाठशाला सिर्फ एक कमरे तक सीमित है। बच्चे यहां चटाई पर बैठे थे। बच्चों का कहना था कि सर्दियों में ठंड लगती है, लेकिन मजबूरन हमें बैठना पड़ता है। दोस्त जो दूसरे स्कूलों में पढ़ते हैं, वो बैंच पर बैठते हैं।
प्राइमरी विद्यालय रोशन गंज एवं माता बाला बाग : दोनाें एक ही भवन में संचालित हैं। एक कमरे में संचालित दो स्कूलों में चार शिक्षक तैनात हैं। कमरे के बाहर खुले प्लाट में टाट-पट्टियों पर बच्चे बैठे हुए थे।
परिषदीय विद्यालय विद्यालयों के आंकडे़
प्राइमरी विद्यालय 1530
जूनियर विद्यालय 627
शिक्षकों की संख्या 5000 के करीब