फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना संचालित है। वहीं इस भोजन से गुरुजी अपनी सेहत बना रहे हैं। बच्चों के बजाय गुरुजी कागजों को ही एमडीएम खिला रहे हैं। बीएसए ने जब टीम गठित कर स्कूलों की जांच कराई तो पोल खुलकर सामर्ने आई। दो स्कूलों में एमडीएम घोटाला सामने निकलकर आया है। इसके चलते बीएसए ने प्रधानाध्यापकों को कन्वर्जन कास्ट और खाद्यान्न की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
घोटाला एक : प्राथमिक विद्यालय नगला पचिया
पहला घोटाला प्राथमिक विद्यालय नगला पचिया में पकड़ा गया है। इस विद्यालय में 751 छात्र पंजीकृत हैं। 27 सितंबर से 10 अक्तूबर तक एबीआरसी से नियमित जांच कराई थी। इसमें नौ दिन में 2138 छात्र उपस्थित पाए गए थे। प्रतिदिन औसत 238 छात्रों की उपस्थिति पाई गई। एक जुलाई से 26 सितंबर तक का एमडीएम डाटा देखा तो औसतन 597 बच्चों को प्रतिदिन के हिसाब से एमडीएम खिलाया। 359 ज्यादा बच्चों को सिर्फ कागजों में ही एमडीएम खिलाया जाता रहा। बीएसए अरविंद पाठक ने प्रधानाध्यापिका सुनीता यादव से एक लाख 15 हजार 942 छात्रों के रिकवरी करने के आदेश दिए हैं। साथ ही 8.63 क्विटंल गेहूं और 17.25 क्विंटल चावल को जमा करने निर्देश जारी किए हैं। प्रधानाध्यापिका सुनीता यादव के खिलाफ आई अन्य शिकायतों पर निलंबित कर दिया गया है।
घोटाला दो : प्राथमिक विद्यालय आसफाबाद
- दूसरा घोटाला प्राथमिक विद्यालय आसफाबाद में पकड़ा गया है। यहां बीएसए ने 27 सितंबर से 10 अक्तूबर तक नियमित जांच कराई तो 3489 बच्चों द्वारा एमडीएम खाया गया था। जबकि एक जुलाई से 26 सितंबर तक औसतन 739 बच्चों द्वारा प्रतिदिन एमडीएम खाया जाता था। 351 छात्रों को सिर्फ कागजों में ही एमडीएम खिलाकर घोटाला किया जा रहा था। पूरी धनराशि को गुरुजी हड़प रहे थे। बीएसए ने प्रधानाध्यापक मोहसिन अब्बास से एक लाख 13 हजार 326 रुपये धनराशि रिकवरी करने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही 8.43 क्विंटल गेहूं और 16.86 क्विटल चावल को जमा करने के आदेश दिए हैं।