आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। महिलाओं के हक और अधिकारों की बात बहुत होती है लेकिन महिला अपराध से लेकर महिलाओं के संरक्षण तक कानून हिचकोले लेते दिखते हैं। जनपद में चूड़ी के काम से जुड़ी महिला श्रमिकों की अपनी दर्द भरी दास्तां हैं। महिला उत्पीड़न के अंधकार के बीच ऐसी महिलाएं भी हैं जो समाज में कीर्तिमान स्थापित कर मिसाल बन चुकी हैं।
महिला दरोगा ने लावारिस बेटी को बना लिया जीवनसाथी
न्यायालय की जटिल प्रक्रिया के आगे आखिर तक नहीं झुकी महिला दारोगा
फीरोजाबाद। महिला दरोगा के सामने जब मात्र छह घंटे की एक नवजात कन्या सामने आई तो उसने शादी का विचार त्याग कर इस नवजात को ही अपना जीवन साथी बना लिया। सब कुछ इस कन्या की परवरिश को समर्पित कर दिया। वर्ष 2007 में अपनाई गई यह बालिका अब आठ साल की हो गई है। महिला दरोगा का यह कदम आधी आबादी के लिए एक मिसाल बन गया।
महिला थाने की उप निरीक्षक भुवनेश्वरी देवी मूलरूप से जनपद अलीगढ़ के गांव गोलरा निवासी प्रोफेसर चौधरी महेशचंद्र की पुत्री हैं। उप निरीक्षक बनने के बाद कासगंज में तैनाती के दौरान छह अगस्त 2007 को रिक्शा चालक को लावारिस कन्या मिली। कन्या उस समय मात्र छह घंटे की थी। रिक्शा चालक नन्हीं बालिका को लेकर थाने पहुंचा तो भुवनेश्वरी ने उसे गोद लेने की ठान ली। उपचार को चिकित्सक के पास खुद ले गईं। उच्चाधिकारियों से गोद लेने की बात कही तो वहां कानूनी पेंच आड़े आ गए। दृढ़ संकल्प के आगे आखिर वे न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने में पीछे नहीं हटी। पहले उसे अनाथ आश्रम में दर्ज कराया। कागजी कार्रवाई पूरी की और इसमें शादी नहीं करना और संपत्ति का वारिस बेटी को बनाने जैसी शर्त स्वीकार कीं। बेटी को नाम दिया भूमिझा। बेटी इस समय अलीगढ़ स्थित एक सीबीएससी स्कूल में कक्षा एक में अध्ययनरत है। भुवनेश्वरी कहतीं हैं वह बेटी के लिए अवकाश लेकर घर जाती हैं। कहतीं हैं कि हमारी बेटी जिस क्षेत्र में जाना चाहेगी उसके बढ़ते कदमों को रुकने नहीं देंगे।
चूड़ी-कांच उद्योग में महिलाएं उत्पीड़न का शिकार
फीरोजाबाद। सुहागनगरी में चूड़ी से जुड़ी हजारों महिलाएं अपने हक और अधिकारों के लिए जद्दोजहद करती नजर आ रही हैं। ट्रेड यूनियन भले ही महिलाओं श्रमिकों को उनका हक दिलाने को प्रयासरत नजर आते हैं लेकिन श्रम विभाग की मनमानी के चलते उनके प्रयास निरर्थक साबित हो रहे हैं। श्रम विभाग कागजों पर ही महिलाओं को हक व अधिकार दिलाने का दिखवा करता नजर आता है। सुहागनगरी में करीब 200 कांच उद्योग गैस से संचालित हैं। इन कारखानों में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भंगार (चूड़ी के टुकड़े) बीनने का कार्य करती हैं। इसके अलावा घर-घर में हजारों महिलाएं चूड़ी जुड़ाई कार्य से जुड़ी हुई हैं।
कारखानों में दयनीय हालत
कांच उद्योग क्रांतिकारी संघ के मंत्री भूरी सिंह यादव का कहना है कि महिला श्रमिकों को हक दिलाने, वेतन बढ़ोत्तरी, न्यूनतम वेतन, आठ घंटे कार्य कराने को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महिला श्रमिकों की समस्याओं के निदान को समय-समय पर श्रम विभाग को ज्ञापन सौंपकर मांग उठाते हैं, लेकिन श्रम विभाग श्रमिकों के हित को छोड़ सेवायोजकों को लाभ पहुंचाने का कार्य करती है। कारखानों में कार्यरत, चूड़ी जुड़ाई कार्य में लगी महिलाओं की हालत बेहद दयनीय है।
सन्निर्माण से श्रमिक महिलाओं को राहत
प्रदेश प्रदेश सरकार द्वारा सन्निर्माण कार्य से जुड़ी महिलाओं के उद्धार को 17 योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सहायक श्रमायुक्त राजेश मिश्रा ने बताया कि मातृत्व हितलाभ के महिला को 12000 रुपये दिए जाते हैं। शिशुहित लाभ योजना के तहत लड़की होने पर 12000 तथा लड़का होने पर 10000 रुपये प्रदान किए जाते हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं
गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर कम करने को सरकार द्वारा प्रत्येक महिला का प्रसव जिला अस्पताल में कराने की योजना है लेकिन अस्पताल में तैनात चिकित्सक व स्टाफ नर्स की मनमानी गर्भवती महिलाओं को भारी पड़ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 2500 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन वास्तव में महिलाओं को इन केंद्रों का लाभ नहीं मिल रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 2500 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, हालांकि इनका लाभ नहीं मिल रहा है।