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UP: बाइक पर पीछे बैठे निजी सहायक ने मारी थी दरोगा को गोली..बचने के लिए अपनाए हथकंडे; आजीवन कारावास की मिली सजा

Tue, 16 Sep 2025 07:06 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

दरोगा को महज 12 इंच की दूरी से गोली मारी गई थी, इससे पुलिस ने यह सिद्ध किया कि दरोगा की चलती बाइक पर पीछे बैठा धीरज ही इतनी कम दूरी से इस वारदात को अंजाम दे सकता है। कोर्ट ने हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
 
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कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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फिरोजाबाद के थाना अरांव के पीथेपुर मार्ग पर दरोगा दिनेश मिश्रा की गोली मारकर हत्या करने के दोषी प्रवीण उर्फ धीरज शर्मा को मंगलवार को एडीजे-2 सर्वेश कुमार पांडेय की कोर्ट ने दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
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अरांव थाने में तैनात दरोगा दिनेश मिश्रा की हत्या 3 अगस्त 2023 को की गई थी। वह एक जांच कर गांव चंदपुरा से लौट रहे थे। उनके साथ उनका निजी सहायक आगरा के कालिंदी विहार निवासी प्रवीण उर्फ धीरज शर्मा बाइक पर पीछे बैठा था। पुलिस ने खुलासा किया था कि धीरज ने दो माह का वेतन न देने, बेटी की फीस के लिए भी रुपये न देने पर गुस्से में आकर दरोगा को गोली मारी थी। 

 

धीरज उस वक्त शराब के अत्यधिक नशे में था। कोर्ट में पुलिस की ओर से पेश साक्ष्यों में बैलिस्टिक रिपोर्ट सबसे अहम रही, जिस पिस्टल से दरोगा को गोली मारी गई थी, वह धीरज के पास से बरामद हुई थी। उसके गन पाउडर और धीरज के हाथों पर लगे मिले गन पाउडर का मिलान हो गया था। इसके अलावा दरोगा को महज 12 इंच की दूरी से गोली मारी गई थी, इससे पुलिस ने यह सिद्ध किया कि दरोगा की चलती बाइक पर पीछे बैठा धीरज ही इतनी कम दूरी से इस वारदात को अंजाम दे सकता है। कोर्ट ने पुलिस के साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर धीरज को दरोगा की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

 

परिजन को नहीं था विश्वास, खड़े किए थे सवाल
दरोगा दिनेश की हत्या के बाद पुलिस ने जब धीरज को जेल भेज दिया था तो दरोगा के बेटे मोहित मिश्रा व अन्य ने कहा था कि उनको खुलासे पर विश्वास नहीं हो रहा है। मांग रखी थी धीरज का पालीग्राफ या नार्को टेस्ट कराया जाए। सवाल खड़ा किया था कि यदि हत्या धीरज ने की तो उसी ने पुलिस को तत्काल सूचना क्यों दी, वह भागा क्यों नहीं, जबकि घटनास्थल पर काफी अंधेरा था। घर से निकलने से पहले दारोगा 50 हजार रुपये लेकर निकले थे, वो कहां गए, धीरज को लेनदेन को लेकर कोई विवाद नहीं था। फिर विवाद की बात कहां से आई आदि।

 

धीरज ने वारदात के बाद खूब किया था पुलिस को गुमराह
इस वारदात के बाद धीरज ने खुद अरांव थाना इंस्पेक्टर को फोन कर गोली मारे जाने की सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची और धीरज पुलिस को गुमराह करता रहा। मगर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जैसी ही खुलासा हुआ कि दारोगा को 12 इंच की दूरी से गोली मारी गई थी, जिसमें उनकी मौत हुई। पुलिस के कान खड़े हो गए। इसके बाद धीरज को धरा गया था।

 
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कन्नौज के रहने वाले थे, आगरा में रहता है परिवार
दरोगा दिनेश मिश्रा मूलरूप से कन्नौज के रहने वाले थे। वर्ष 2002 से कालिंदी विहार में परिवार सहित रह रहे थे। उनकी दो बेटी और एक बेटा है। बड़ी बेटी पूजा लखनऊ में पुलिस विभाग में हैं। दिनेश मिश्रा फिरोजाबाद से पूर्व आगरा के थाना एत्माद्दौला, ताजगंज, रकाबगंज में भी रह चुके थे। हत्या से तीन साल पहले फिरोजाबाद आए थे। 26 महीने तक जिले में हेड मोहर्रिर रहे। सात महीने पहले ही हेड मोहर्रिर से प्रमोशन पाकर दरोगा बने थे।

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