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Firozabad News: दिहुली कांड के बाद से लक्ष्मी परिवार समेत फरार, इंदल और रुखन भी लापता

Thu, 20 Mar 2025 01:32 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
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जसराना। गांव दिहुली में 44 वर्ष पूर्व हुए नरसंहार में बीस लोगों के खिलाफ हत्या जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। मैनपुरी के बाद उच्च न्यायालय और फिर मैनपुरी में मुकदमे की सुनवाई हुई। सुनवाई में तीन लोगों को फांसी की सजा अदालत ने सुना दी। मामले में आरोपी 13 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि चार लोगों को पुलिस आज तक नहीं ढूंढ सकी है। दो के बारे में तो पुलिस भी जानकारी नहीं दे सकी।
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लायक सिंह ने गिरोह के सरगना संतोष उर्फ संतोषा और राधे सहित 18 अन्य सदस्यों खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में नाम आने के बाद से लक्ष्मी गांव से परिवार सहित फरार हो गया। उसके बाद गांव में किसी ने आज तक उसको नहीं देखा। पीड़ित पक्ष के लोगों का भी कहना है कि लक्ष्मी को तलाशने का प्रयास किया गया था लेकिन नहीं मिला। पुलिस को आज भी लक्ष्मी, इंदल और रुखन, ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना की तलाश है। ज्ञानचंद्र उर्फ गिन्ना थाना औंछा क्षेत्र का रहने वाला है। इंदल और रुखन के बारे में पुलिस के साथ ही पीड़ित पक्ष को भी कोई जानकारी नहीं है। थाना प्रभारी निरीक्षक शेर सिंह ने बताया कि रिकॉर्ड नहीं होने के कारण अधिक जानकारी नहीं हो पा रही है। मामले में कप्तान सिंह, रामसेवक और रामपाल को फांसी की सजा हो चुकी है।



हत्यारों के परिवारों में मायूसी, हाईकोर्ट में लगाएंगे गुहार
जसराना। थाना क्षेत्र के गांव दिहुली में 44 वर्ष पूर्व हुए नरसंहार में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद गांव पीड़ित फैसले को सही बता रहे हैं वहीं दूसरे पक्ष के लोगों में मायूसी छायी है। परिजन ने मैनपुरी की डकैती कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाने की बात कही है।18 नवंबर 1981 को थाना जसराना के गांव दिहुली में जातीय संघर्ष में राधे-संतोषा गैंग के सदस्यों ने सामूहिक रूप से नरसंहार की वारदात को अंजाम दिया था। दो घंटे से अधिक समय तक हुए गोलीबारी में दलित समुदाय के 24 लोगों की जान चली गई थी। 9 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। 44 वर्ष तक मैनपुरी के बाद उच्च न्यायालय तक चले मामले में मंगलवार को मैनपुरी की डकैती कोर्ट ने रामपाल सिंह, रामसेवक एवं कप्तान सिंह को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाने के साथ ही अर्थदंड लगाया है। रामपाल सिंह एवं कप्तान सिंह दिहुली के निवासी है।
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अदालत का निर्णय आने के बाद से ही सजायाफ्ता परिवारों में मायूसी छायी हुई है। सजायाफ्ता रामपाल सिंह की पुत्री राधा देवी ने पिता रामपाल सिंह को निर्दाेष बताते हुए गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाया। कहा कि घटना को राधे-संतोषा के साथ अन्य लोगों ने अंजाम दिया था, जिनकी मौत हो चुकी है। रुधी हुई आवाज में उन्हाेंने बताया कि पिता की उम्र 87 वर्ष हो चुकी है। घटना के समय वह मौजूद नहीं थे। वहीं सजायाफ्ता परिवार से जुड़ी शकुंतला देवी ने कहा कप्तान सिंह एवं रामपाल सिंह को गलत तरीके से फंसाया गया है। इस दौरान मौजूद पुरुषों ने कहा मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जाकर न्याय की मांग की जाएगी। कहा उनके पक्ष को सुने बिना ही निर्णय दिया गया है।


दूसरे दिन भी गांव में तैनात रही पुलिस

जसराना। सामूहिक नरसंहार मामले में आए अदालत के फैसले के बाद एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। फोर्स द्वारा फ्लैग मार्च करने की बात कही गई है। गांव में शांति बनी हुई है। फैसले के बाद पीड़ितों को अनहोनी का डर सता रहा है और उन्होंने नियमित रूप से गांव में पुलिस की तैनाती की मांग की है।
44 वर्ष पहले थाना जसराना के गांव दिहुली में हुए सामूहिक नरसंहार मामले में अदालत ने दिहुली निवासी दो लोगों के साथ तीन लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। मंगलवार को अदालत का फैसला आने से पहले ही थाना जसराना से पुलिस फोर्स पहुंच गया। थाना प्रभारी निरीक्षक शेर सिंह ने बताया दिहुली में पुलिस चौकी बनी हुई है। गांव शांति का माहौल है। फिर भी माहौल पर नजर रखी जा रही है। पीड़ित पक्ष की महिला ने बताया नरसंहार में उसके भाई की मौत हुई थी। कहा कि आज भी आरोपी पक्ष के लोग जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन्होंने गांव में नियमित रूप से पुलिस या फिर पीएसी के जवान तैनात करने की मांग की।
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