जैनाचार्य ने ससंघ नगर में किया प्रवेश।
जैनाचार्य वसुनंदी महाराज ससंघ सहित 15 पिच्छिकाओं का मंगल प्रवेश बैंडबाजों के साथ हुआ। इस दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पाद प्रक्षालन एवं आरती उतारकर मुनिश्री का स्वागत किया। अहिंसा के उद्घोष गूंज उठे।
पौने सात बजे मुनि ससंघ जैसे ही रसूलपुर पहुंचा तो वसुनंदी महाराज के जयकारों से सुहागनगरी गूंज उठी। बैंडबाजों के साथ मुनि संसघ घंटाघर, दूध वाली गली होते हुए चंद्रप्रभु मंदिर पहुंचा। मुनि ससंघ ने देवदर्शन किए। उन्होंने प्रवचन में कहा कि गुरु, भगवान, मुनि के पैर नहीं छूते हैं, बल्कि चरण वंदना करते हैं। माता-पिता के पैर छूए जाते हैं। उन्होंने कहा कि चरणवंदना करने से अधिक पुण्यार्जन होता है। इस दौरान मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अजय जैन एडवोकेट, ललितेश जैन, ललितमोहन रपरिया, प्रो. एसी जैन, अरुण जैन पीली कोठी, जितेंद्र जैन मुन्ना, प्रमोद जैन सोनल, राजेशचंद्र जैन, वीरेंद्र भदावर, विजय जैन देवता, मुकेश जैन, पंकज जैन आदि रहे।