फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने के लिए गंगाजल लाने वाले कांवड़ियों से क्षेत्र की सड़कें गुंजायमान हैं। वे रंग बिरंगी कांवड़ लेकर भोले के भजनों को गाते हुए कतारबद्ध होकर गनतव्य को चल जा रहे हैं। कांवड़िये लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
‘गंगा तेरे नीर को तड़पत हैं दिन रात, महर भई भोलानाथ की सो खूब करे स्नान’ इन्हीं जयकारों के साथ आजकल क्षेत्र की सड़कें पर कांवड़ियों की भीड़ दिखाई दे रही है। फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि को भोले को प्रसन्न करने के लिए लोग टोलियां बनाकर कांवड़ लेेकर आ रहे हैं।
इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। कस्बा के एक शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लाकर बटेश्वर चढ़ा चुके हैं।क्षेत्र के गांव करौंदा निवासी सत्येंद्र सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने भोले बाबा से पुत्र प्राप्ति की कामना करते हुए कांवड़ चढ़ाने की मनोकामना की थी। बताया कि भोलेनाथ के आशीर्वाद से पुत्र प्राप्त होने पर उन्होंने कांवड़ चढ़ाई। वहीं इस वर्ष भी कांवड़ लाने का मन बना रहे हैं।
सोरों से पच्चीस से अधिक कांवड़ लाकर जसराना के वनखण्डेश्वर एवं बटेश्वर के शिवजी का अभिषेक कर चुके मोहल्ला गाड़ीवान निवासी गया प्रसाद शर्मा ने कहा कि सच्चे मन से की गई आराधना हमेशा पूर्ण होती है। कांवड़ लाकर भोलेनाथ का गंगाजल से अभिषेक करने पर मनोकामना अवश्य पूरी होती हैै।
मोहल्ला अरेलपुरा निवासी महेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि दस से अधिक कांवड़ ला चुके हैं। कांवड़ लाकर उन्हें भोले का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। वहीं, जसराना निवासी रामदत्त दीक्षित ने कहा कि वह निस्वार्थ भाव से भोले की कांवड़ लाते रहे हैं। थक जाने पर अब कांवड़ लाने का कार्य उनका बेटा कर रहा है।