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जैन मंदिर में हुआ शांति विधान, भक्ति की धूम

Sun, 23 Apr 2017 10:39 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
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जैन मंदिर में शांति विधान का आयोजन किया गया।
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श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर गांधी नगर में रविवार को भक्ति की धूम रही। विधिविधान के  साथ शांति विधान का आयोजन किया गया। इसमें प्रभु को भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित कर विश्व में शांति की मनोकामना मांगी गई। मंदिर में सर्वप्रथम श्रीजी की शांतिधारा की गई। इसका सौभाग्य अजय कुमार जैन को प्राप्त हुआ। मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। शांतिनाथ भगवान को 64 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान राजबहादुर जैन, पप्पू जैन परिवार के संयोजन में किया गया। इस दौरान महावीर जैन, सुरेश चंद्र जैन, चक्रेश जैन, मनीष जैन, रतन जैन, विकास जैन, पप्पू जैन और वर्धमान महिला मंगल की सदस्याएं उपस्थित रहीं।
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अहिंसा ही सर्वोपरि : जैनाचार्य विभक्त सागर
फिरोजाबाद (ब्यूरो)। शहर के प्रमुख श्री चंद्रप्रभु जैन मंदिर में जैनाचार्य विभक्त सागर महाराज ने कहा कि सभी धर्मों में अहिंसा को सर्वोपरि कहा गया है। हिंसा को किसी भी धर्म में कोई स्थान नहीं है। जैनाचार्य ने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हैं और हिंदू धर्म में 24 अवतार। 25वां ना किसी में था, न किसी में है, न हीं किसी में होगा। जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ हैं और हिन्दू धर्म में प्रथम अवतार आदीश्वर हैं। उन्हें आदि ब्रह्मा भी कहा जाता है। मुस्लिम धर्म में प्रथम पैगंबर बाबा आदम खा हैं। आत्मा एक है और मानने वाले अनेक हैं। जो ये कहते हैं कि हिंसा में ही धर्म है वो सम्यक दृष्टि नहीं मिथ्या दृष्टि हैं । ऐसे व्यक्ति नियम से नरक का बंध करके नरक में जाते हैं। जैन मुनि यादवेन्द्र सागर मुनिराज ने कहा कि पंचम काल का प्राणी हिंसा में धर्म मानने लगा है ।जबकि किसी भी धर्म में हिंसा के लिए कोई भी स्थान नहीं है। हिंसा को छोड़कर धर्म के मार्ग पर लगकर अपना कल्याण करें।
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