महिलाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा का है। सुरक्षा के मुद्दे पर विधायकों की चुप्पी महिलाओं को अखरती है। छेड़छाड़ की वारदातों पर कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं बोलता। महिला थाने में महिलाओं की ही नहीं सुनी जाती है। अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित फोकस ग्रुुुप में चुनाव पर मंथन करते हुए महिला संगठनों से जुड़ी समाजसेवी महिलाओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं ने बेबाक राय रखी। किसी भी दल की ओर से महिला को टिकट न देने पर गहरी चिंता जताई गई। जिले में अब तक महिला विधायक न होने पर अफसोस जताया।
वोट देना हम सभी का नैतिक दायित्व है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा का है। सरकार ऐेसी हो जो महिलाओं को सुरक्षा का माहौल दे सके। शाम ढलने के बाद महिलाएं घर से नहीं निकल सकती। विधायक भी ऐेसा हो महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर भी ध्यान दे।
प्रीति गुप्ता (शिक्षिका एमजीएम ढोलपुरा)
यह जिला बालिका सुधारगृह की लंबे समय से जररूत महसूस कर रहा है। कई बार जनप्रतिनिधियों को बताया गया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। महिला थाना शहर से दस किलोमीटर दूर है। सभी थानों में महिलाओं से जुडे़ मामले निस्तारित करने की प्लानिंग होनी चाहिए।
कल्पना राजौरिया (फेडरेशन आफीसर जायंट्स ग्रुप इंटरनेशनल)
नारी को अपनी शक्ति पहचनानी चाहिए। अधिकारों के लिए आगे आना चाहिए। विधायक भी महिलाओं से जुड़ी समस्याएं गंभीरता से हल कराएंगे। शहर में श्रमिक महिलाओं की संख्या काफी है, इनके भी योजनाएं लानी चाहिए।
सपना दीदी (प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम)
विधायक को बालिका शिक्षा पर खास ध्यान देना चाहिए। सरकार को चाहिए कि प्राइवेट स्कूलों में भी बालिकाओं के लिए फीस कम हो। कोर्स काफी महंगा है। अफसोस होता है जब टोल टैक्स पूरा लिया जाता है लेकिन हाईवे पर सड़के खराब हैं। जाम लगा रहता है।
गौरी बंसल (सदस्य जायंट्स ग्रुप महिला शक्ति)
महिलाएं अधिक से अधिक मतदान करने जाएं। विधायक ऐसा होना चाहिए जिसकी कथनी-करनी में अंतर न हो। वादे पूरे होने चाहिए। लोगों को भी चाहिए जब जनहित का कोई बड़ा मामला विधायक उठाते हैं जो जनता भी उनका साथ दे।
सरिता दीदी (संचालिका प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय आश्रम)
शासन सुविधाएं और योजनाएं बहुत देता लेकिन स्थानीय स्तर पर वह ठीक से लागू नहीं हो पाती हैं। यूपी 100 स्कीम भी तब फेल दिखती है जब सूचना देने पर भी पुलिस न पहुंचे। इसके उदहारण भी हैं जब पुलिस के संसाधन होते भी मदद नहीं करती।
आभा कुलश्रेष्ठ (शिक्षिका स्वामी रामतीर्थ इंटर कालेज)
महिलाओं के उत्पीड़न के मामले काफी बढ़े हैं इसके लिए व्यवस्था दोषी है। चुनाव से पहले घर-घर वोट मांगने प्रत्याशी जाते हैं। जीतने के बाद भी विधायक को घर-घर जाना चाहिए, लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। ऐसा क्यों नहीं होता कि जीतन के बाद विधायक एक बार भी किसी मोहल्ले में नहीं जाते।
डा. निधि गुप्ता (प्रवक्ता दाऊदयाल महिला महाविद्यालय)
महिलाओं के वोट सभी दलों को चाहिए लेकिन दुर्भाग्य है कि किसी भी दल ने महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है। क्या यहां से किसी महिला को विधायक बनने का अधिकार नहीं। जीतने के बाद विधायक को महिला संगठनों के साथ बैठक करके उनसे जुड़ी समस्याओं का निदान कराना चाहिए।
मनोरमा शर्मा (पुस्तकालय विभाध्यक्ष दाऊदयाल महाविद्यालय)
महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ शहर ही नहीं जिले की गंभीर समस्या है। लड़कियां डरते-डरते घर से बाहर कदम रखती हैं। स्कूल कोचिंग आते-जाते में हर समय मनचलों से दहशत में रहती हैं। कभी कोई विधायक पुलिस पर इतना दवाब क्यों नहीं बना पाता कि छेड़छाड़ रोकने को मजबूत योजना बनें।
ममता अग्रवाल (सचिव-न्यू जीनियस ग्रुप)
बालिका शिक्षा पर किसी विधायक ने ध्यान नहीं दिया। बालिका शिक्षा के लिए बीस साल पहले जो स्थिति थी वही अब है। वह जब पढ़ती थी तब से एमए उर्दू की क्लास की मांग उठ रही है लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पायी है। इसके लिए अभी भी आगरा जाना पडता है।
शीबा हाशिम (प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय कोटला कन्या)
शिक्षिकाओं ने उठाया पेंशन का मुद्दा
परिचर्चा में शामिल हुईं शिक्षिकाओं ने पेंशन का मुद्दा उठाया। शिक्षिकाओं ने कहा कि विधायक प्रमाण पत्र मिलते ही पेंशन का हकदार बन जाते हैं और शिक्षक बीस साल की नौकरी के बाद भी पेंशन के हक से वंचित कर दिए गए। सभी दल इस पर खामोश क्यों हैं..।