गर्मी की दस्तक के साथ ही डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया से निपटने के लिए अभी तक कोई प्लानिंग तैयार नहीं की है। अस्पताल परिसर में न तो डायरिया वार्ड बना है और न ही दवाआें का पर्याप्त इंतजाम है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि किसी क्षेत्र में यदि डायरिया फैला तो अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को कहां भर्ती किया जाएगा?
लगातार मरीजों की संख्या में इजाफेे के कारण वार्ड संख्या एक, दो और तीन फुल है। इसके चलते चिकित्सक मरीजों को भर्ती करने के नाम पर हाथ खड़े कर रहे हैं। मंगलवार सुबह टीबी से पीड़ित रसूलपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला बड़ा लालपुर निवासी सत्यप्रकाश पुत्र किशोरीलाल को लेकर उनका भाई सत्यवीर सरकारी ट्रामा सेंटर पहुंचा लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसका कारण चिकित्सकों ने वार्ड में जगह न होना बताया। बुधवार रात तबीयत बिगड़ी तो गुरुवार को सत्यवीर सुबह फिर से सत्यप्रकाश को लेकर सरकारी ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचा लेकिन उन्हें अब भी भर्ती नहीं किया गया। इन परिस्थितियों का सामना कई मरीजों को करना पड़ रहा है।
सात दिनों में अस्पताल पहुंचे 77 पीड़ित
गर्मी की दस्तक के साथ ही डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। डायरिया से पीड़ित 77 मरीज पांच अप्रैल से 11 अप्रैल तक जिला अस्पताल पहुंच चुके हैं। यह सरकारी ट्रामा सेंटर में इलाज कराने वाले मरीजों का आंकड़ा है। वहीं प्राइवेट नर्सिंग होम के साथ देहात और कस्बे में प्राइवेट चिकित्सकों के यहां पहुंचने वाले मरीजों की संख्या तो इनसे कई गुना अधिक है।
सरकारी ट्रामा सेंटर का हाल, कबाडे़ में पड़े बेड और गद्दे
सरकारी ट्रामा सेंटर की स्थिति काफी दयनीय है। कहने को यहां तीन वार्ड है लेकिन एक वार्ड में चार बेड,दूसरे वार्ड में छह बेड और तीसरे वार्ड में आठ बेड है। हालांकि तीसरे वार्ड का कभी ताला ही नहीं खुलता। इसके चलते मरीजों को वार्ड नंबर एक और दो में ही भर्ती किया जाता है। इसके बाद या तो मरीज को अस्पताल के वार्ड के लिए रेफर कर दिया जाता है अथवा घर भेज दिया जाता है। ऐसा नहीं यहां पर दवाओं के मरीजों की देखरेख करने के लिए स्टाफ की व्यवस्था न हो। इसके बाद भी मरीजों को भर्ती करने के नाम पर हाथ खड़े किए जाते है।
स्टाफ नर्स का आफिस बना पंचायत कक्ष
सरकारी ट्रामा सेंटर में स्टाफ नर्स का आफिस पंचायत कक्ष बना हुआ है। यहां तैनात नर्स और वार्ड ब्वॉय सुबह आठ बजे ड्यूटी पर आने के बाद दोपहर दो बजे तक फोन पर बात करते नजर आते है अथवा उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर अपनी ड्यूटी को पूरा समझ कर चलते बनते है। इसका प्रमुख कारण इनकी चेकिंग के लिए ट्रॉमा सेंटर में अधिकारियों का न होना है।
ट्रामा सेंटर में कुछ अव्यवस्थाएं है, जिन्हें एक, दो दिन में दुरुस्त करा दिया जाएगा। मरीजों को भर्ती करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। सत्यप्रकाश टीबी से पीड़ित था। इसलिए उसे टीबी अस्पताल के अलावा कहीं और भर्ती नहीं किया जा सकता था।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमएस फिरोजाबाद