युवक के साथ मारपीट और आत्महत्या के लिए प्रेरित किए जाने के मामले में अपर जिला जज प्रभू नारायन पांडेय ने पूर्व सांसद के पुत्र को दोषी पाते हुए उसको फरार घोषित कर जमानतियों को नोटिस जारी कर दिए है। इस मामले की जांच सीबीसीआईडी द्वारा की गई थी।
टूंडला थाना क्षेत्र के मोहल्ला तेल मील रोड निवासी बीना गुप्ता द्वारा 29 जून 1995 को टूंडला पुलिस को दी गई तहरीर में कहा था कि पति नबाव सिंह (मुनीम जी) 1.50 लाख रुपये लेकर घर आ रहे थे। तभी रास्ते पूर्व सांसद चौधरी मुल्तान सिंह (जलेसर लोकसभा क्षेत्र) के पुत्र यदुनाथ सिंह ने पकड़ लिया, और नबाव सिंह के साथ मारपीट करते हुए 1.50 लाख रुपये भी छीन लिए। इसके चलते नबाव सिंह ने घर आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पीड़िता बीना गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व सांसद के बेटे यदुनाथ सिंह के खिलाफ लूट और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज कर लिया। आरोपी पूर्व सांसद का बेटा था। इसलिए पीड़िता ने विवेचना सीबीसीआईडी से कराने की मांग पुलिस अधिकारियों से की। इस पर विवेचना सीबीसीआईडी को ट्रांसफर कर दी। सीबीसीआईडी द्वारा जांच कर आरोपी यदुनाथ के खिलाफ न्यायालय में चार्टशीट दाखिल कर दी। सीबीसीआईडी की ओर से मुकदमे की पैरवी अभियोजन अधिकारी आगरा खंड आगरा छविरंजन दुबे व वादी पक्ष के अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने आरोपी के खिलाफ साक्ष्य और गवाह पेश किए। साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अपर जिला जज प्रभू नारायन पांडेय ने आरोपी को दोषी पाया। लेकिन आरोपी के न्यायालय में उपस्थित न होने के कारण अपर जिला जज प्रभू नारायन पांडेय ने आरोपी को फरार घोषित करते हुए जमानतियों को वारंट जारी किए है।
जहर खाने से पहले नबाव सिंह ने लिखा था सुसाइट नोट
अभियोजन अधिकारी छवि रंजन दुबे ने बताया कि नबाव सिंह ने आत्महत्या करने से पूर्व सुसाइट नोट लिखा था। इसकी जांच कराई गई थी। जांच में यह साफ हो गया कि जो सुसाइट नोट मृतक के पास से मिला है। वह सुसाइट नोट नबाव सिंह के हाथों द्वारा ही लिखा गया है।