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योगीराज में सड़कों के दिन बहुरने की जागी उम्मीद

Sun, 26 Mar 2017 11:13 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
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जिले में कई सड़कों पर गड्ढे हो रहे हैं।
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योगीराज में अवैध कट्टीघरों पर शिकंजा, एंटी रोमियो के खिलाफ अभियान, थानों में सफाई, स्कूलों में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड, अफसरों के दफ्तर में बैठने के समय का निर्धारण शुरू हो चुका है। अब सीएम ने 15 जून तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने के आदेश दिए हैं। इसके बाद जिले की सड़कों के दिन बहुरने की उम्मीद जागी है।
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फिरोजाबाद की बात करें तो रैपुरा रोड गड्ढे दिखे। ट्यूबवेल के पानी के कारण गड्ढा काफी गहरा हो गया। दिन में धूल उड़ती है,लगता ही नहीं पक्का मार्ग होगा। नगला बरी चौराहे से सैलई खैरगढ़ को जाने वाले मार्ग में पाइप लाइन खोदने के कारण गड्ढे हो गए। रामगढ़ रोड गड्ढों में दिखा।मटसेना रोड की हालत अच्छी नहीं है। शिकोहाबाद में मुख्य बड़ा बाजार की सड़कों में गड्ढे होने के कारण राह निकलने में दिक्कत होती है।  
जसराना क्षेत्र में कुछ सड़कें बेहतर हो गई। जसराना से अरांव तक जाने वाले दस किलोमीटर लंबे मार्ग के गड्ढे नहीं भरे। मुस्तफाबाद एवं एका रोड खराब है। मुस्तफाबाद रोड से घाघऊ रोड गड्ढों में दिखाई देता है। नारखी क्षेत्र की सड़कों की हालत में सुधार नहीं हुआ। यहां असन से बरतरा तक आठ किलोमीटर मार्ग गड्ढे ही गड्ढे हैं। गौंछ से नारखी तथा नारखी से पचोखरा तक जाने वाले 14 किमी लंबे मुख्य मार्ग की हालत खराब है। नारखी से ओखरा रामनगर,नारखी से कोटला किमी,ब्रहमदेव चौकी से जाटऊ मार्ग,रैमजा से बछगांव मार्ग,नारखी से कनवार की ओर जाने वाले मार्ग खस्ताहाल है। खैरगढ़ में प्रमुुख मार्गों में शुमार खैरगढ़ से लालई मार्ग गड्ढों में ही बदल गया। शेखपुरा से काली मंदिर,जखारा से जरौली को मार्ग खराब हैं। हाथवंत से पाइपलाइन खोदने के कारण आए दिन ट्रैक्टर ट्राली पलटती हैं। सिरसागंज क्षेत्र में कठफोरी से मई गदोखर,कठफोरी से नगला सिहंगमन मार्ग गड्ढों में बदल गए। सिरसागंज से हैवतपुर, सिरसाखास से उजरई बंबा मार्ग के गड्ढों को नहीं भरवाया गया है। नए मुख्यमंत्री से जनता सुधार की ही उम्मीद लगाए बैठी है। देखना यह होगा कि सीएम की यह घोषणा ग्रामीण जनता को कितनी राहत देती है।
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ई-टेंडर व्यवस्था से रुकेगा सत्ता का दखल
 चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पूर्व सड़कों को गड्ढा मुक्त करने को 80 करोड़ रुपया मिला। तभी सत्ता से जुड़े ठेेकेदारों के बीच टेंडर हथियाने को जोर अजमाइश चली। बदली व्यवस्था के बीच पुराने ठेकेदार ही काम करेंगे या फिर नए सिरे से टेंडर होंने यह भी पेंच फंस गया है। माना जा रहा है कि ई-टेंडर व्यवस्था से ठेके हथियाने में अब तक होता रहा सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल रुक सकेगा।
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