फिरोजाबाद। फ्रांस की एक संस्था, एएनएसईएस की ओर से कांच की बोतलों में पैक पेय पदार्थों में माइक्रो प्लास्टिक कणों की मौजूदगी के दावे पर फिरोजाबाद के कांच उद्योग ने कड़ा विरोध जताया है। स्थानीय कांच उद्यमियों और निर्यातकों ने इन दावों को कांच बोतल इंडस्ट्रीज के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
कांच उद्यमियों का कहना है कि कांच की बोतलें पूरी तरह से सुरक्षित होती हैं और उनमें किसी भी तरह के प्लास्टिक मैटेरियल का मिश्रण नहीं किया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि पेय पदार्थों में माइक्रो प्लास्टिक कणों की मौजूदगी प्लास्टिक उत्पादों जैसे टेट्रा पैक और कैन के ऊपर लगे रंगीन ढक्कनों या धातु के ढक्कनों पर होने वाले पेंट के कारण हो सकती है।
कांच उद्योग जगत ने भारत सरकार से इस तरह का दुष्प्रचार करने वाली विदेशी संस्था के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
- कांच बोतल निर्माण पूरी तरह से सुरक्षित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। प्लास्टिक इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार कारोबारी साजिश है। बोतलों के ऊपर अलग-अलग धातुओं के ढक्कनों पर होने वाले कलर के कण पेय पदार्थों में आसानी से घुल जाते हैं।
राजकुमार मित्तल, अध्यक्ष यूपीजीएमएस
- कांच उत्पादों में माइक्रो प्लास्टिक का मिश्रण सिर्फ कल्पना है। फिरोजाबाद में निर्मित कांच पैकिंग आयटम पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कांच बोतल अथवा ट्रेटा पैक के ऊपर लगे धातु के ढक्कनों में लगे रंग के कारण पेय पदार्थों में माइक्रो प्लास्टिक संभावित हैं।
मुकेश बंसल टोनी, अध्यक्ष द एक्सपोर्ट एसोसिएशन