ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए संसदीय समिति द्वारा सुहागनगरी के परंपरागत कांच उद्योग को टीटीजेड से हटाने की सिफारिश के बाद उद्यमियों ने अपने बचाव की तैयारी करनी शुरू कर दी है। उद्यमी प्रदूषण के आंकड़ों के सहारे अपने बचाव का पक्ष तीन अगस्त को दिल्ली में होनी वाली बैठक में रखेंगे। संसदीय समिति की रिपोर्ट को वह उचित नहीं मान रहे हैं। इसके रिपोर्ट के पीछे उन्हें कोई साजिश दिखाई दे ही है।
सुहागनगरी के कांच उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एनजीटी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि संसदीय समिति की रिपोर्ट ने उद्यमियों को हलकान कर दिया। संसदीय समिति द्वारा अप्रैल-15 में आगरा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन व सदस्यों द्वारा पाल्यूशन के संबंध में परीक्षण किया गया। समिति द्वारा ताजमहल के ईद-गिर्द के अलावा कहीं प्रदूषण की जांच नहीं की गई। कांग्रेस सांसद अश्विनी कुमार की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई। इसके अलावा समिति ने लोकसभा में प्रश्न भी उठाया कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद कांच इकाइयों को विस्तारीकरण की अनुमति क्यों और किसके द्वारा दी गई। संसदीय समिति ने यह भी कहा है कि कांच उद्योग की चिमनियों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण फैला रहा है। आगरा की ओर बहने वाली हवा से ताजमहल पीला हो रहा है, जो ताज के लिए बड़ा खतरा है।
क्या है संसदीय समिति की सिफारिश
संसदीय समिति द्वारा राज्यसभा में पेश की गई रिपोर्ट में कहा है कि ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए आसपा के क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा कर चल रहे डीजल जनरेटरों पर तुरंत लगाई है। टीटीजेड में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के विस्तार की जांच होनी चाहिए। इन उद्योगों में वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली स्थापित करना अनिवार्य किया जाए। समिति ने आसपास के चूड़ी और पेठा उद्योग समेत उन सभी औद्योगिक इकाइयों को टीटीजेड से बाहर करने की सिफारिश की है।
एनजीटी ने लगाया था यह आरोप
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आरोप लगाते हुए कहा था कि फीरोजाबाद में 60 ग्लास उद्योग बिना स्थापना और परिचालन की अनुमति के चल रहे हैं। बिना आवश्यक अनुमति के चलने वाले यह ग्लास उद्योग न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि फीरोजाबाद के निवासियों को विषाक्त प्रदूषकों के बीच जीवन जीने को बाध्य कर रहे हैं। पहले से ही संवेदनशील ताज ट्रिपेजियम जोन की वायु गुणवत्ता को बदतर कर रहे हैं। एनजीटी ने इन उद्योगों को बंद कराने के अनुरोध किया है।
कांच उद्योग पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप
सुहागनगरी के बोतल कारोबार को समाप्त करने के पहले भी आरोप लगते रहे हैं। कांच उत्पादों की खराब गुणवत्ता, प्रदूषण बढ़ाने सहित कई आरोप लगाते हुए बड़े ग्रुपों द्वारा लगातार बोतल कारोबार को बंद कराने की मांग उठाई जा रही है।
सड़कों की दुर्दशा, दौड़ते वाहन बढ़ा रहे प्रदूषण
नीरी द्वारा प्रदूषण के संबंध में जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें कहा था कि सड़कों की दुर्दशा एवं बड़े स्तर पर वाहनों के आवागमन से प्रदूषण बढ़ रहा है। सार्वजनिक वाहनों का फिटनेश प्रमाण पत्र का प्रावधान है। नीरी से टीटीजेड में बाहर से आने वाले वाहनों के प्रदूषण जांच की भी बात उठाई थी।
सुहागनगरी में शोर ज्यादा प्रदूषण कम
उद्यमियों का मानना है कि सुहागनगरी में कांच उद्योग के नाम पर प्रदूषण का शोर ज्यादा मचाया जा रहा है, जबकि वास्तव में कांच उद्योग के नाम प्रदूषण आज भी मानक से नीचे है। यहां जो प्रदूषण है वह आरएसपीएम (वायु प्रदूषण) है, उसका कारण सड़कों पर बड़ी संख्या में दिन-रात दौड़ने वाले वाहन हैं।
तो लाखों श्रमिक हो जाएंगे बेरोजगार
सुहागनगरी में वर्ष 1996 तक 411 चूड़ी व कांच उद्योग कोयला से संचालित होता था। वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड में आने वाले कारखानों में कोयले पर पूरी तरह बैन लगा दिया था। वर्तमान में 198 उद्योग नेचुरल गैस से संचालित हो रहे हैं, जिसमें करीब पांच लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। सुहागनगरी का कांच उद्योग कारखानों तक सीमित नहीं है। शहर के हर गली-मोहल्ले में घर-घर चूड़ी का काम होता है। यदि कांच उद्योग को टीटीजेड से बाहर का रास्ता दिखाया तो लाखों श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे, जिससे शहर में अराजकता का माहौल उत्पन्न हो सकता है।
संसदीय कमेटी ने आगरा में बैठकर फीरोजाबाद के कांच उद्योग द्वारा प्रदूषण फैलाने की बात कही है, जबकि हकीकत यह है कि 11 माह हवा ताजमहल की ओर नहीं चलती है। कांच उद्योग का कोई प्रदूषण नहीं है। कांच उद्योग को बिना वजह मोहरा बनाया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है।
मोहन बाबू अग्रवाल
कांच उद्योग पूरी तरह नेचुरल गैस से संचालित हो रहा है। हर साल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा कांच उद्योगों के प्रदूषण की जांच की जाती है। इसके बावजूद प्रदूषण के नाम पर बिना वजह शोर मचाया जा रहा है। तीन अगस्त होने वाली बैठक में हम अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।
हनुमान प्रसाद गर्ग
कांच उद्योग को बर्बाद करने के लिए हिंदुस्तान के बड़े समूहों द्वारा साजिश रची जा रही है। यहां नेचुरल गैस से ही 198 इंडस्ट्रीज चल रही हैं। नई इकाई स्थापित नहीं हुईं। पाल्यूशन भी लिमिट के अंदर चल रहा है। बड़े उद्योगों को छोटी इंकाइयों को समाप्त करने का इरादा छोड़ देना चाहिए। हम सांसद के माध्यम से अपनी बात संसद तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
अरुण जैन